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आठ सौ की गिरफ्तारी के आदेश पर लगा स्टे

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बेंच का आदेश

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिवीजन बेंच ने आठ सौ लोगों की गिरफ्तारी के आदेश पर स्टे लगा दिया है। बुधवार को सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने कहा है कि संविधान की धारा 324 के तहत निर्वाचन आयोग को चुनाव पर नियंत्रण का पूरा अधिकार है, पर यह अन्य कानून के दायरे में भी आता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में तैनात पुलिस आब्जर्वर का आदेश त्रूटिपूर्ण है। कुछ नागरिकों को ट्रबल मेकर के रूप में चिन्हित किए जाने का उनका आदेश गलत है।

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि यह अंतरीम आदेश जून के आखिरी दिन तक या इससे पहले दिए जाने वाले आदेश तक लागू रहेगा। बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतरीम आदेश नागरिक प्रशासन या पुलिस प्रशासन की राह में रोड़ा नहीं बनेगा। अगर कोई भी बीएनएस एक्ट, आरपीएक्ट 1951 या अन्य किसी आपराधिक कानून के तहत कोई अपराध करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। एहतियातन गिरफ्तारी के मामले में सख्ती के साथ डिटेंशन कानून की धाराओं पर अमल करना पड़ेगा। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से पहले ट्रबल मेकर, यानी उत्पात करने वाले, के नाम पर गिरफ्तारी करने की क्या आवश्यकता है। जबकि इस तरह के आपराधिक मामलों में कार्रवाई की जाने के लिए कानून है। एडवोकेट अनामिका पांडे ने बताया कि दानिश फारूकी की तरफ से यह मामला दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए यह सूची तैयार की गई है। निर्वाचन आयोग के एडवोकेट डी एस नायडू ने कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। इसके साथ ही कहा कि ये सारी सूचनाएं बेहद संवेदनशील हैं। पीटिशनर के पक्ष में बहस करते हुए सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार तो पुलिस के पास है। एडवोकेट जनरल किशोर दत्त की दलील थी कि बूथों के पास कानून और व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। ट्रबल मेकर शब्द का आविष्कार निर्वाचन आयोग ने किया है। कानून के किसी प्रावधान में इसका जिक्र नहीं है।




आठ सौ की गिरफ्तारी के आदेश पर लगा स्टे

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बेंच का आदेश

पुलिस ऑब्जर्वर का आदेश त्रूटिपूर्ण

नागरिकों को ट्रबल मेकर नहीं करार दे सकते

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिवीजन बेंच ने आठ सौ लोगों की गिरफ्तारी के आदेश पर स्टे लगा दिया है। बुधवार को सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने कहा है कि संविधान की धारा 324 के तहत निर्वाचन आयोग को चुनाव पर नियंत्रण का पूरा अधिकार है, पर यह अन्य कानून के दायरे में भी आता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में तैनात पुलिस आब्जर्वर का आदेश त्रूटिपूर्ण है। कुछ नागरिकों को ट्रबल मेकर के रूप में चिन्हित किए जाने का उनका आदेश गलत है।

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि यह अंतरीम आदेश जून के आखिरी दिन तक या इससे पहले दिए जाने वाले आदेश तक लागू रहेगा। बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतरीम आदेश नागरिक प्रशासन या पुलिस प्रशासन की राह में रोड़ा नहीं बनेगा। अगर कोई भी बीएनएस एक्ट, आरपीएक्ट 1951 या अन्य किसी आपराधिक कानून के तहत कोई अपराध करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। एहतियातन गिरफ्तारी के मामले में सख्ती के साथ डिटेंशन कानून की धाराओं पर अमल करना पड़ेगा। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से पहले ट्रबल मेकर, यानी उत्पात करने वाले, के नाम पर गिरफ्तारी करने की क्या आवश्यकता है। जबकि इस तरह के आपराधिक मामलों में कार्रवाई की जाने के लिए कानून है। एडवोकेट अनामिका पांडे ने बताया कि दानिश फारूकी की तरफ से यह मामला दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए यह सूची तैयार की गई है। निर्वाचन आयोग के एडवोकेट डी एस नायडू ने कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। इसके साथ ही कहा कि ये सारी सूचनाएं बेहद संवेदनशील हैं। पीटिशनर के पक्ष में बहस करते हुए सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार तो पुलिस के पास है। एडवोकेट जनरल किशोर दत्त की दलील थी कि बूथों के पास कानून और व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। ट्रबल मेकर शब्द का आविष्कार निर्वाचन आयोग ने किया है। कानून के किसी प्रावधान में इसका जिक्र नहीं है।

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