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मृतक के भाई को नहीं है पेंशन पाने का हक

कानून के मुताबिक वह नहीं है परिवार का अंग

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी के डिविजन बेंच ने अपने एक फैसले में कहा है कि मृतक के भाई को पेंशन पाने का हक नहीं है। इसकी वजह यह है कि 1981 की पेंशन स्कीम के मुताबिक परिवार की परिभाषा में भाई शामिल नहीं है। मृतक के भाई ने फेमिली पेंशन दी जाने के लिए पीटिशन दायर किया था। डिविजन बेंच ने इसे खारिज कर दिया।

एडवोकेट घनश्याम पांडे ने बताया कि पीटिशनर का भाई एक स्कूल में टीचर था और सेवा के दौरान ही उसकी मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी ने दूसरा ब्याह रचा लिया और मां की मौत हो गई। पीटिशनर ने फिर वारिसान हक हासिल करने के बाद बकाया पेंशन ब्याज सहित दी जाने के लिए हाई कोर्ट के सिंगल बेंच में मामला दायर किया था। सिंगल बेंच ने उसके पीटिशन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि वह कानून के अनुसार परिवार में नहीं आता है। इसके बाद उसने डिविजन बेंच में अपील दायर की थी। उसके एडवोकेट की दलील थी कि पत्नी ने दूसरा ब्याह रचा लिया, इसलिए मां मरने के दिन तक पेंशन पाने की हकदार थी। राज्य सरकार की दलील थी कि मां ने कभी भी पेंशन के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इस लिए पीटिशनर पेंशन पाने का हकदार नहीं है। यहां गौरतलब है कि मामला चलने के दौरान ही पीटिशनर की मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी और बेटी पीटिशनर बन गई। अलबत्ता सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि पीटिशनर को पीएफ और ग्रेच्यूटी का भुगतान किया जाए। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि पीटिशनर ने वारिसान हक 2017 में हासिल किया था, पर इसमें हुई देर के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। इसलिए पीटिशनर की अपील खारिज की जाती है।


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