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पोक्सो मामले में हाई कोर्ट ने सजा को बहाल रखा

हावड़ा के पोक्सो कोर्ट ने सुनाया था फैसला

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पोक्सो के एक मामले में हाई कोर्ट ने दो को सुनायी गई उम्र कैद और एक को दस साल की कठोर सजा को हाई कोर्ट ने बहाल रखा है। जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस शब्बार रसीदी के डिविजन बेंच ने हावड़ा के पोक्सो कोर्ट द्वारा सुनायी गई सजा को सही करार दिया है। डिविजन बेंच ने कहा है कि अगर इससे कम सजा सुनायी गई होती तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होता।

एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मंजरिश त्रिपाठी और बालक राम यादव व पंकज कुमार ने यह अपील दायर की थी। यह 2015 की घटना है और इस नाबालिगा के साथ हावड़ा से पंजाब जा रही एक ट्रेन में बलात्कार किया गया था। पीड़िता को मधुपुर स्टेशन से बेहोसी की हालत में बरामद किया गया था। डिविजन बेंच न दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि पीड़िता को एक अभियुक्त ने जबरन शराब पिलाया था। इसके बाद उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। इस अभियुक्त को पीड़िता के साथ ही ट्रेन से बरामद किया गया था। दो अन्य अभियुक्त, बालक राम यादव और पंकज कुमार फरार हो गए थे। इन दोनों ने भी सामूहिक बलात्कार में हिस्सा लिया था। पुलिस ने पंकज कुमार यादव और बालक राम को गिरफ्तार करने का पूरा प्रयास किया था। उनकी तस्वीरे सेना और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स के पास भेजी गई थी। सीआईएसएफ ने दोनों को गुवाहाटी एअर पोर्ट से भेजी गई तस्वीरों के आधार पर गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया था और टीआई परेड कराया गया था। पीड़िता ने टीआई परेड में उनकी पहचान की थी। डॉक्टर ने दाखिल की गई रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि करते हुए कहा था कि तीनों अभियुक्त शारीरिक संबंध किए जाने के मामले में सक्षम है। डिविजन बेंच ने कहा है कि उपरोक्त तथ्यों के आधार पर पोक्सो कोर्ट के फैसले में दखल देने की कोई वजह नहीं है।


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