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पत्नी के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप, हाई कोर्ट की मुहर

तलाक मंजूरी के फैसले को सही ठहराया

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकता : हाई कोर्ट के जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्या और जस्टिस सुप्रतीम भट्टाचार्या के डिविजन बेंच के फैसले से एक पति को भारी राहत मिली है। लोवर कोर्ट ने पत्नी के खिलाफ लगाए गए उत्पीड़न के आरोप को सही करार देते हुए पति की तलाक की अर्जी को मंजूरी दी थी। पत्नी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। डिविजन बेंच ने लोवर कोर्ट के फैसले को सही करार देते हुए इसमें दखल देने से इनकार कर दिया।

एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पति ने 2010 में तलाक का मुकदमा दायर किया था और 2021 में लोवर कोर्ट ने तलाक की याचिका को मंजूरी दी थी। इसके खिलाफ अपील की गई थी। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि उसे तीन मुद्दों पर विचार करना था। क्या पत्नी के खिलाफ पति और उसके परिवार का मानसिक उत्पीड़न किए जाने का आरोप सही है। क्या पति पत्नी के बीच का वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका है और उसे जीवंत बनाना मुमकिन नहीं है। तथ्यों के मुताबिक यह स्पष्ट है कि पति के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद है और यह मानसिक उत्पीड़न के दायरे में आता है। तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा है कि पत्नी के खिलाफ लगाए गए उत्पीड़न के आरोप के आधार पर पति की तरफ से दायर तलाक की याचिका को मंजूरी देने का आसनसोल के अतिरिक्त जिला जज का फैसला सही था। यहां कोर्ट के पास इसे बदलने और कोई विकल्प सुझाने की कोई गुंजाइश नहीं है। इस फैसले में कुछ भी अवैधानिक नहीं है। डिविजन बेंच ने कहा है कि पत्नी सिविल कोर्ट में हिंदू मैरिज एक्ट के तहत गुजारा भत्ता के लिए दावा कर सकती है। डिविजन बेंच ने कहा है कि पत्नी 2009 में घर छोड़ कर चली गई थी। अब वैवाहिक संबंध को बहाल करना मुमकिन नहीं है





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