जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने बर्खास्तगी खिलाफ दायर बीएसएफ के एक अफसर की अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस सिन्हा ने अपने आदेश में कहा है कि अगर इस अफसर को सेवा में बहाल रखा जाता है तो बीएसएफ का मनोबल गिरेगा। इसके खिलाफ फोर्स में नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगा है। इसके साथ ही कहा है कि यह देश हित के पक्ष में भी नहीं होगा।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मो. फरहाद जमान ने यह पीटिशन दायर किया था। जस्टिस सिन्हा ने अपने फैसले में कहा है कि इस बात का स्पष्ट सुबूत है कि पीटिशनर और अन्य लोग इस गैरकानूनी व अनैतिक कार्य से जुड़े हुए थे। कोई भी व्यक्ति जिसके पास दिमाग और सोचने समझने की शक्ति है नहीं चाहेगा कि ऐसे एक वर्दीधारी अफसर को फोर्स में रखा जाए जिसके खिलाफ फोर्स में नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगा है। अगर इसके साथ कोई भी सहानुभूति या नरमी दिखाई जाती है तो इससे फोर्स के साथ ही समाज के बीच भी एक गलत संदेश जाएगा। इसके खिलाफ आरोप है कि मेडिकल टेस्ट के दौरान रिश्वत ले कर मेडिकली फिट होने का सर्टिफिकेट दिलाया करता था। इस तरह के गैरकानूनी कार्य को फोर्स में बर्दास्त नहीं किया जा सकता है। इस तरह के मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीटिशनर के खिलाफ आरोप है कि 2018 में बीएसएफ में जवानों की भर्ती के दौरान उसने एक डॉक्टर के साथ साजिश करके रिश्वत ली थी। इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं इसलिए इसका ट्रायल सेक्यूरिटी फोर्स कोर्ट में नहीं किया जा सकता है। इसकी सीबीआई जांच कर रही है इसलिए सीबीआई कोर्ट में ही ट्रायल किया जा सकेगा।