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जब एफआईआर ही नहीं तो फिर कोर्ट में मामला क्यों

डीसी शांतनु सिन्हा विश्वास के मामले में ईडी का सवाल

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : लाल बाजार में डीसी के पद पर तैनात शांतनु सिन्हा विश्वास के पिटीशन के मामले में इसकी ग्रहण योग्यता पर ईडी ने सवाल उठाया है। ईडी की दलील थी की इस मामले में जब एफआईआर ही नहीं की गई है तो फिर रिट कोर्ट में मामला कैसे दायर कर सकते हैं। इसके साथ ही सवाल था कि जब सम्मन की अवधि ही समाप्त हो गई है तो यह मामला स्वत: ही प्रभावहीन, इंफक्शस, हो गया है। जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी के कोर्ट में शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई।

ईडी ने कोयला घोटाले के मामले में शांतनु सिन्हा विश्वास को तलब करते हुए सम्मन जारी किया था। इसे खारिज करने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में पेटीशन दायर किया है। ईडी की तरफ से बहस करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि ई डी के पास किसी को भी सम्मन भेज कर तलब करने का अधिकार है। जब तक उसे अभियुक्त नहीं करार दिया जाता है तब तक सिविल प्रोसिडिंग नहीं शुरू हो सकती है। ईडी तो गवाहों को भी हाजिर होने के लिए तलब कर सकती है। इसके साथ ही उनकी दलील थी कि इस कोर्ट के पास संविधान की धारा 226 के तहत इस मामले को सुनने का डिटरमिनेशन ही नहीं है। डिप्टी सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने बताया कि शांतनु विश्वास को पहली बार 30 मार्च को सम्मन भेज कर दो अप्रैल को हाजिर होने को कहा गया था। उन्होंने एक पत्र दे कर समय देने अपील की थी । इसके बाद दो अप्रैल को सम्मन भेज कर आठ अप्रैल को हाजिर होने को कहा गया था। पेटीशनर की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट सब्यसाची बनर्जी ने इसका जवाब देने के लिए समय देने की अपील की तो जस्टिस मुखर्जी ने अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तारीख तय कर दी।

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