जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सीआईएसएफ का एक जवान 65 फीसदी विकलांग है। इसके बावजूद उसका तबादला विशाखापट्टनम कर दिया गया है। उसकी वीआरएस की अर्जी भी मंजूर नहीं कर रहे हैं। तबादले के आदेश के खिलाफ उसने हाई कोर्ट में एक पीटिशन दायर किया था। जस्टिस अमृता सिन्हा ने मामले की सुनवाई के बाद उसके तबादले पर स्टे लगा दिया है।
एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस सिन्हा ने चार सप्ताह के अंदर वालंटरी रिटायरमेंट के उसके आवेदन पर फैसला लेने का आदेश दिया है। पीटिशन के मुताबिक सीआईएसएफ का यह जवान पूरी तरह अचल है। वह चल नहीं सकता है, वह सामने की तरफ झुक नहीं सकता है, वह सीधे खड़ा नहीं हो सकता है। कड़ी मेहनत का काम नहीं कर सकता है। इसे सुनने के बाद जस्टिस सिन्हा का सीआईएसएफ के एडवोकेट से सवाल था कि आप उसे वीआरएस क्यों नहीं दे रहे हैं। उसे फोर्स में क्यों बनाये रखना चाहते हैं। यह आदमी तो फोर्स के लिए एक बोझ है। पीटिशनर के एडवोकेट ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि वीआरएस के लिए कई बार आवेदन किया पर इसे तवज्जो नहीं दिया गया। उसे पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में तैनात किया गया है। हाई कोर्ट के आदेश पर ही उसकी मेडिकल जांच की गई थी। पुरुलिया के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का एक बोर्ड गठन किया गया था। मेडिकल सर्टिफिकेट में कहा गया है कि उसकी यह विकलांगता 2035 तक बनी रहेगी। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पीटिशनर का तबादला विशाखापट्टनम में कर दिया गया। साथ ही आदेश भी दिया कि उसे चार अप्रैल को ड्यूटी से मुक्त कर दिया जाएगा। सीआईएसएफ के एडवोकेट की दलील थी कि पीटिशनर को 14 साल तक उसके आवास के नजदीक पोस्टिंग दी गई हैै। इसपर जस्टिस सिन्हा का सवाल था कि उसे फोर्स में रखना ही क्यों चाहते हैं।