जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता के फेमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रमुख जज ने पति को प्रति माह गुजारा भत्ता के मद में प्रति माह 80 हजार रुपए दिए जाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही पति पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में रीविजन पीटिशन दायर किया था। जस्टिस शुभ्रा घोष ने मामले की सुनवायी के बाद अतिरिक्त प्रमुख जज के आदेश पर स्टे लगा दिया। अलबत्ता फेमिली कोर्ट को आदेश दिया है कि इस मामले की सुनवायी करीब दो माह के अंदर पूरी की जाए। यहां पति व पत्नी के बीच तलाक का मामला चल रहा है।
जस्टिस घोष ने आदेश दिया है कि मामले की सुनवायी के दौरान किसी भी पार्टी की अपील पर सुनवायी मुल्तवी नहीं की जाए। जस्टिस घोष ने स्पष्ट किया है कि दो माह की अवधि सुनवायी की अगली तारीख से माना जाएगी। जस्टिस घोष ने अपने आदेश में कहा है कि एक करार के तहत पति ने पत्नी को 32 लाख रुपए दिया था। इसके अलावा पत्नी के पास आय की अपनी स्रोत भी है। इस तरह वह मामले का निपटारा नहीं होने तक अपनी जिम्मेदारी उठा सकती है। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि वह इस दौरान दयनीय स्थिति में पहुंच जाएगी। एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि जस्टिस घोष ने अपने आदेश में कहा है फेमिली कोर्ट ने जुर्माना लगाने के बाबत कोई ठोस वजह नहीं बताया है। लिहाजा इस आदेश को खारिज किया जाता है। इस पीटिशन में पत्नी पर करार से मुकरने का आरोप भी लगाया गया है। पति और पत्नी के बीच 2022 की फरवरी में एक करार हुआ था। इसके तहत पति ने पत्नी को 32 लाख रुपए दिया था। इसके साथ ही यह भी करार हुआ था कि पत्नी की तरफ से दायर आपराधिक मुकदमों से बरी होने या मामलों को वापस लेने के बाद 32 लाख रुपए और देगा। पत्नी ने पहली किश्त पाने के बाद आपराधिक मुकदमों को वापस लेने से इनकार कर दिया था।