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स्पेशल एडुकेटरों की नियुक्ति क्यों नहीं : हाई कोर्ट

एक मामले की सुनवायी के दौरान जस्टिस सिन्हा का सवाल

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में स्पेशल एडुकेटरों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है। जबकि विशेष रूप से आवश्यकता वाले बच्चों (चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड्स) की संख्या राज्य में 1.45 लाख के करीब है। यह संख्या अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा है। एक स्पेशल एडुकेटर ने उम्र की सीमा में छूट दी जाने को एक मामला दायर किया है। इस मामले की शुक्रवार को सुनवायी के दौरान जस्टिस अमृता सिन्हा ने यह सवाल किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में एक आदेश देते हुए कहा था कि सभी राज्यों में स्पेशल एडुकेटरों की नियुक्ति की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए एक स्क्रीनिंग कमेटी का भी गठन किया था। इस आदेश के तहत उन स्पेशल एडुकेटरों को नियुक्त किया जाना था जो दस पंद्रह साल से विशेष रूप से आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। इनकी नियुक्ति ठेका या रोजाना भुगतान के तहत की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित किए जाने का आदेश दिया था। स्क्रीनिंग कमेटी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि प्रत्येक मामले पर विचार कर के उम्र की सीमा में छूट देने के बाबत फैसला ले। राज्य में स्पेशल एडुकेटरों की नियुक्ति के लिए एसएससी की तरफ से पिछले साल अगस्त में अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें आवेदन करने के लिए सितंबर तक का समय दिया गया था। इसके बाद से प्रक्रिया अभी आगे नहीं बढ़ पायी है। इस मामले में पीटिशनर ने उम्र की सीमा में छूट देने की अपील की थी। इस अधिसूचना में उम्र की न्यूनतम सीमा 22 साल और अधिकतम 45 साल रखी गई है। पीटिशनर की दलील थी उसने 2011 से 2021 तक स्पेशल एडुकेटर के रूप में काम किया था। उम्र अधिक हो जाने के कारण वह इस अधिसूचना के तहत आवेदन नहीं कर पा रहा है। इस मामले में सरकार की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट ने उम्न की सीमा में छूट दी जाने की बात सिर्फ उनके मामले में कहा था जो सेवा दे रहे हैं। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि इसमें स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट से ही लिया जा सकता है। लिहाजा मामले की सुनवायी मार्च तक के लिए टाल दी जा रही है। इस दौरान पीटिशनर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।


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