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बर्खास्तगी के खिलाफ पांचवीं रिट भी खारिज

डिविजन बेंच ने लगायी अपनी मुहर

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस मधुरेश प्रसाद और जस्टिस सुप्रतीम भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने बर्खास्तगी के खिलाफ दायर पांचवें पीटिशन को खारिज कर दिया। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि पीटिशनर के कृत्य का असर छात्र-छात्राओं के करियर पर पड़ा है। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि पीटिशनर अपनी अकादमिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए बाध्य था। उसने ऐसा नहीं करके एक शैक्षिक संस्थान के अकादमिक माहौल को पटरी से उतारने का काम किया था। इससे छात्र-छात्राओं का करियर प्रभावित हुआ था।

डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि यहां यह प्रासंगिक है कि 2004 में चार्ज मेमो दिये जाने के बाद यह पीटिशनर का पांचवां रिट पीटिशन है। रिट पीटिशनर डॉ. तापस रंंजन बंद्योपाध्याय निट दुर्गापुर के फैकल्टी मेंबर थे। चार्ज मेमो दिए जाने के बाद उन्हें 2007 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। अपीलेट ऑथरिटी ने 2010 में इसपर अपनी मुहर लगा दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में रिट पीटिशन दायर किया था। सिंगल बेंच ने सुनवायी के बाद 2016 में इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद इसके खिलाफ डिविजन बेंच में अपील की गई थी। डॉ. बंद्योपाध्याय के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने बीटेक पाठ्यक्रम का प्रश्नपत्र बनाने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कापियों की जांच करने से भी इनकार कर दिया था। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि पीटिशनर की तरफ से दी गई दलील में कोई दम नजर नहीं आया है। पीटिशनर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के जिन फैसलों का हवाला दिया गया है वह इस मामले की परिस्थितियों के लिहाज से प्रासंगिक नहीं हैं। पीटिशनर ने जो कृत्य किया है उसकी सत्यता को लेकर कोई विवाद नहीं है। लेकिन इसका असर छात्र-छात्राओं के करियर पर पड़ा था।


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