जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आरजीकर के भ्रष्टाचार के मामले में इसके पूर्व अध्यक्ष संदीप घोष की प्रमुख भूमिका रही है। उनकी जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवायी के दौरान सीबीआई की तरफ से यह दलील दी गई। इस याचिका की सुनवायी कर रहे जस्टिस तीर्थंकर घोष ने सीबीआई से सवाल किया कि डॉ. आशिष पांडे के खिलाफ अलग से मामला क्यों नहीं दायर किया गया। यहां गौरतलब है कि डॉ. पांडे इस मामले में एक अभियुक्त है।
सीबीआई की तरफ से पैरवी करते हुए डीएसजी एडवोकेट राजदीप मजुमदार ने कहा कि हाउस स्टाफ की नियुक्तियों में रिश्वत ली गई। उनका कार्यकाल छह माह का होता है। उनकी नियुक्तियों के लिए कभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई। गैरकानूनी तरीके से उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा है। उन्हें इसके लिए एक परीक्षा देनी पड़ती है। लिखित परीक्षा के लिए 85 नंबर होते हैं तो इंटरव्यू में 15 नंबर दिए जाते हैं। एडवोकेट मजुमदार ने कहा कि इसी 15 नंबर में हेराफेरी की जाती रही है। एमएसवीपी के पास कभी भी मेरिट लिस्ट अप्रूवल के लिए नहीं भेजी जाती रही है। गवाहों के मुताबिक संदीप घोष खुद ही इनमें हेराफेरी करते थे। उन्होंने कहा ठेका देने के मामले में कभी भी किसी नियम का पालन नहीं किया गया। हालांकि वे इसके लिए बनायी गई 13 सदस्यों की कमेटी में शामिल नहीं थे। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनका नाम सामने नहीं आए। इसके साथ ही कहा कि अगर भ्रष्टाचार का यह मामला नहीं होता तो शायद दूसरी घटना भी नहीं घटी होती। इन सारे मामलों में डॉ. आशिष पांडे प्रमुख भूमिका निभाते थे। वसूली के साथ साथ थ्रीट कल्चर के मामले में उनकी प्रमुख भूमिका होती थी। इस मौके पर जस्टिस घोष ने सवाल किया कि तो फिर डॉ. पांडे के खिलाफ अलग से मामला क्यों नहीं दायर किया गया। क्या इससे मामला कमजोर नहीं हो जाएगा। इसकी अगली सुनवायी 22 जनवरी को होगी।