निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता के ऐतिहासिक आउट्राम घाट पर स्थित सी एक्सप्लोरर्स इंस्टीट्यूट पिछले चार दशकों से युवाओं को समुद्र की गहराई और नदियों की लहरों से दोस्ती करना सिखा रहा है। अब इन जांबाज सी एक्सप्लोरर्स की शक्ति को दोगुना करने के लिए उनके साथ 'हैम रेडियो' की तकनीक को जोड़ा गया है। युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (NDRF) से मान्यता प्राप्त यह संस्थान जब साहसिक अभियानों पर निकलता है, तो सबसे बड़ी चुनौती संचार की होती है। गहरे समंदर और उफनती नदियों के बीच जहां मोबाइल के टावर जवाब दे जाते हैं, वहां हैम रेडियो इन एक्सप्लोरर्स के लिए ढाल और उम्मीद की इकलौती आवाज बनकर उभरता है।
पाठ्यक्रम में शामिल हुई यह जीवन रक्षक तकनीक
हाल ही में संस्थान के आउट्राम घाट स्थित कार्यालय में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां प्रशिक्षुओं को आपातकालीन संचार के गुर सिखाए गए। संस्थान ने हैम रेडियो के महत्व को देखते हुए अब इसे अपने नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बना लिया है। आपदा के समय जब बिजली गुल हो जाती है और इंटरनेट का नामोनिशान नहीं रहता, तब यह बेतार संचार का माध्यम दुनिया से जुड़े रहने का एकमात्र सहारा होता है। इस कार्यशाला में छात्रों को सिखाया गया कि समुद्र की उठती लहरों के बीच एक डगमगाती नाव पर भी किस तरह अस्थायी रेडियो स्टेशन तैयार किया जाता है।
बचाव कार्यों में साबित होगा मील का पत्थर
वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम रेडियो) के सचिव अंबरीष नाग विश्वास ने बताया कि यह प्रशिक्षण सी एक्सप्लोरर्स के लिए बेहद जरूरी है। चूंकि ये युवा आपदा के समय राहत कार्यों में सबसे आगे रहते हैं, इसलिए उन्हें तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। जब किसी चक्रवात या बाढ़ में सारे संपर्क टूट जाते हैं, तब इनके द्वारा बनाए गए अस्थाई स्टेशन ही फंसे हुए लोगों और प्रशासन के बीच सेतु का काम करते हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को न केवल तकनीक से जोड़ा गया, बल्कि उन्हें भविष्य की आपदाओं के लिए भी एक 'संकटमोचक' के रूप में तैयार किया गया है। कार्यशाला में देवव्रत मुखर्जी और सुदीप देब की महत्वपूर्ण भूमिका है।