निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : उत्तरपाड़ा के लालबाबा कॉलेज में 1970 के दशक में शुरू हुई एक अनूठी दोस्ती को 50 साल बाद नया जीवन मिला है। 75 वर्ष की उम्र में भारतीय रेलवे के पूर्व कर्मचारी सत्यजीत सरकार (सत्य दा) की अपनी पुरानी कॉलेज सहेली सर्वानी चंद से दोबारा मिलने की अधूरी इच्छा आखिरकार पूरी हो गई। इस भावुक पुनर्मिलन को संभव बनाने में वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम रेडियो) और उनके सदस्य सोना रजक ने मुख्य भूमिका निभाई।
1972 के नक्सल आंदोलन के दौर की दोस्ती
सत्यजीत सरकार 1972 के नक्सल आंदोलन के दौरान उत्तरपाड़ा लालबाबा कॉलेज में छात्र परिषद के सक्रिय पदाधिकारी थे। वहीं कला विभाग की मेधावी छात्रा सर्वानी चंद से उनकी गहरी पहचान हुई थी। सत्यजीत बाद में कोलकाता मैदान में फुटबॉल खिलाड़ी भी रहे और दिवंगत कांग्रेस नेता प्रिय रंजन दासमुंशी के उत्तर हावड़ा में चुनावी एजेंट के रूप में भी कार्य किया। उम्र के इस पड़ाव और बीमारी के कारण अकेले रह रहे सत्यजीत को अपनी पुरानी सहेली की याद सताने लगी, लेकिन शादी के बाद सर्वानी का उपनाम और पता बदल जाने से उन्हें खोजना असंभव लग रहा था।
टोबिन रोड से तलाश निकाली गईं सर्वानी
समाचार पत्रों में वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब द्वारा बिछड़े लोगों को मिलाने की खबरे पढ़कर सत्यजीत ने क्लब के संपादक अंबरिश नाग विश्वास से संपर्क किया। क्लब के सदस्य सोना रजक ने कड़ी मशक्कत के बाद बरानगर के टोबिन रोड इलाके से सर्वानी के परिवार को ढूंढ निकाला। जब फोन पर सत्यजीत की आवाज सर्वानी तक पहुंची, तो वे भावुक हो उठीं और तुरंत पहचान गईं—“सत्य दा, आप वही सत्य दा हैं!” इसके बाद दोनों ने अपने छात्र जीवन और पुरानी यादों को ताजा किया। रेडियो क्लब के संपादक ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे क्लब के लिए गर्व का क्षण बताया।