GRSE को वर्क ऑर्डर हैंडओवर करते शंकर घोष और पूर्णिमा चक्रवर्ती 
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ग्रीन मोबिलिटी को रफ्तार: बंगाल सरकार से GRSE को दो हाइब्रिड फेरी और दो बेली ब्रिज का ऑर्डर

कोलकाता । रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत किया है। कंपनी को पश्चिम बंगाल टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (WBTDCL) से दो हाइब्रिड डीजल-इलेक्ट्रिक फेरी और दो बेली ब्रिज बनाने का ऑर्डर मिला है। इन परियोजनाओं से राज्य में पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन और दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में आयोजित ‘फॉर्मल वर्क ऑर्डर हैंडओवर’ कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन विभाग के प्रभारी मंत्री डॉ. शंकर घोष, पर्यटन विभाग की राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती, GRSE के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त) तथा GRSE और WBTDCL के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

100 यात्रियों की क्षमता वाली होंगी फेरी

GRSE के अनुसार, प्रत्येक हाइब्रिड फेरी 24 मीटर लंबी और आठ मीटर चौड़ी होगी। इसमें एक बार में 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी और इसके संचालन के लिए करीब एक मीटर ड्राफ्ट की आवश्यकता होगी। इन फेरी को विशेष रूप से कुशल और पर्यावरण अनुकूल इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट के लिए डिजाइन किया गया है। फेरी हाइब्रिड डीजल-इलेक्ट्रिक मोड में अधिकतम नौ नॉट और पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड में सात नॉट तक की गति हासिल कर सकेंगी। इनमें बैटरी और डीजल जनरेटर आधारित उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम लगाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक परिचालन लागत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी। साथ ही, कम शोर और कंपन के कारण यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर मिलने की उम्मीद है। इन फेरी को इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के मानकों के अनुरूप क्लासिफाइड किया जाएगा।

दो बेली ब्रिज का भी ऑर्डर

पश्चिम बंगाल सरकार ने GRSE को 70R रोड क्लास के मानक चौड़ाई वाले दो बेली ब्रिज बनाने का ऑर्डर भी दिया है। मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के डिजाइन और निर्माण में GRSE की विशेषज्ञता को देखते हुए यह ऑर्डर दिया गया है। GRSE के मुताबिक, कंपनी अब तक भारतीय सेना, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन, विभिन्न राज्य सरकारों, केंद्रीय एजेंसियों और मित्र देशों को 5,900 से अधिक मॉड्यूलर स्टील ब्रिज की आपूर्ति कर चुकी है। ऐसे पुलों का इस्तेमाल विशेष रूप से उन इलाकों में किया जा सकता है, जहां तेजी से कनेक्टिविटी स्थापित करने की जरूरत होती है।

ढेउ’ के बाद ग्रीन मोबिलिटी में बढ़ी भागीदारी

पश्चिम बंगाल में GRSE की ग्रीन मोबिलिटी परियोजनाओं में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। कंपनी ने 2025 में राज्य की अगली पीढ़ी की जीरो-एमिशन इलेक्ट्रिक फेरी ‘ढेउ’ की डिलीवरी की थी। इसके बाद राज्य के पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन कार्यक्रम में GRSE की भूमिका और मजबूत हुई है। कंपनी के अनुसार, नए अनुबंधों के बाद GRSE वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार के लिए कुल 13 हाइब्रिड डीजल-इलेक्ट्रिक फेरी का निर्माण कर रहा है। इससे राज्य के विभिन्न जलमार्गों पर पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।

कनेक्टिविटी और आत्मनिर्भरता पर जोर

GRSE ने कहा कि नए ऑर्डर कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता और समय पर परियोजनाएं पूरी करने की क्षमता में पश्चिम बंगाल सरकार के भरोसे को दर्शाते हैं। कंपनी के मुताबिक, इन परियोजनाओं के जरिए घरेलू स्तर पर विकसित तकनीक और विनिर्माण क्षमता का इस्तेमाल करते हुए टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। कंपनी ने कहा कि ये परियोजनाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप भी हैं। हाइब्रिड फेरी से जहां कार्बन उत्सर्जन और परिचालन लागत को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है, वहीं मॉड्यूलर बेली ब्रिज दूरदराज के इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। GRSE के अनुसार, ग्रीन मोबिलिटी और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए विकसित किए जा रहे ये घरेलू समाधान न केवल परिवहन व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाने में योगदान देंगे, बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों और समावेशी विकास को भी गति दे सकते हैं।

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