निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नैहाटी : एम्बुलेंस के हेल्पर से लेकर पूर्व टीएमसी विधायक और करोड़पति बनने तक का सनत दे का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है जिन्हें रंगदारी, जबरन वसूली और नकली दवा बेचने के आरोपों में पुलिस ने शुक्रवार की रात दत्तपुकुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें शनिवार को बैरकपुर अदालत में पेश कर पुलिस ने हिरासत में लिया है। मिली जानकारी के अनुसार सनत दे की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत एक सक्रिय टीएमसी कार्यकर्ता के रूप में हुई थी। वर्ष 2021 में वे नैहाटी टाउन टीएमसी युवा अध्यक्ष बने। इसी दौरान वे स्थानीय नेता पार्थ भौमिक के करीब आए। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब पार्थ भौमिक सांसद चुने गए, तब खाली हुई नैहाटी विधानसभा सीट के उपचुनाव में सनत दे को टीएमसी का टिकट मिला और वे जीतकर विधायक बने।
रंगदारी, जबरन वसूली सहित कई शिकायतों पर पुलिस ने की कार्रवाई
हालांकि, राजनीतिक प्रभाव और ताकत के साथ-साथ उन पर गंभीर आरोप भी लगने लगे। 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में भी उनका नाम आया। श्रम मंत्री अर्जुन सिंह ने उन पर नकली दवाइयों के अवैध कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया था। बंगाल में सत्ता बदलने और जनआक्रोश बढ़ने के बाद हाल ही में जब वे पार्टी कार्यालय खोलने पहुंचे, तो उन पर अंडे फेंके गए और 'चोर-चोर' के नारे लगे। पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों के आधार पर आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को हालांकि कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने के दौरान पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत फंसाया गया है।