निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नदिया : पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की कृष्णनगर नगर पालिका में प्रशासक की नियुक्ति के बाद बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने राजनीतिक और सामाजिक उबाल पैदा कर दिया है। नगर पालिका बोर्ड को भंग कर प्रशासक बैठाए जाने के तुरंत बाद लगभग 250 अस्थाई कर्मचारियों को काम से निकाल दिया गया है। इस फैसले के विरोध में शुक्रवार को नगर पालिका परिसर युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया।तृणमूल का झंडा लेकर प्रदर्शन, गेट पर जड़ा तालादिलचस्प बात यह है कि काम से निकाले गए ये कर्मचारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थक हैं। शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में पीड़ित कर्मचारी हाथों में तृणमूल का झंडा लेकर नगर पालिका के मुख्य द्वार पर जमा हुए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और नगर पालिका के गेट पर ताला जड़ दिया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें काम पर वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और तालाबंदी जारी रहेगी।
दो चरणों में हुई 250 कर्मियों की छंटनी
जानकारी के अनुसार, कृष्णनगर की अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) शारद्वती चौधरी को नगर पालिका का प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद से ही छंटनी की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
पहला चरण: प्रशासक ने जिम्मेदारी संभालते ही लगभग 105 दैनिक वेतनभोगी संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया।
दूसरा चरण: नए साल के पहले ही दिन (1 जनवरी 2026) को लगभग 150 अन्य कर्मचारियों को भी निकाल दिया गया।इनमें से कई कर्मचारी ऐसे हैं जो पिछले कई वर्षों से नगर पालिका में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। अचानक हुई इस कार्रवाई ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
क्यों लिया गया छंटनी का फैसला?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कृष्णनगर नगर पालिका में तृणमूल पार्षदों के बीच लंबे समय से चल रहे आपसी गुटबाजी और कलह के कारण राज्य नगर विकास विभाग ने बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया था। प्रशासन का तर्क है कि नगर पालिका में दैनिक अनुबंध (Daily Wage Contract) पर आवश्यकता से अधिक कर्मचारी नियुक्त थे, जिनका वेतन वहन करना नगर पालिका के वित्तीय कोष के लिए संभव नहीं हो पा रहा था। आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ही "कर्मचारी कटौती" का यह कदम उठाया गया है।"
कोरोना काल में जान जोखिम में डाली, अब मिला यह सिला"
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने प्रशासन पर "सौतेला व्यवहार" करने का आरोप लगाया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "हमने कभी काम में कोताही नहीं बरती। जब कोरोना महामारी के दौरान लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे थे, तब हमने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की और नगर पालिका का काम संभाला। आज हमें बिना किसी पूर्व सूचना के सड़क पर फेंक दिया गया।" प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे तृणमूल कांग्रेस के वफादार सिपाही हैं और अपनी बहाली के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। फिलहाल, इस घटना के बाद कृष्णनगर में तनाव बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर नजर रख रही है।