150 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है भारत-ओमान ज्वेलरी व्यापार
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जून महीने से लागू हुए भारत-ओमान कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत गुरुवार को पूर्वी भारत में कोलकाता से सोने के आभूषणों की पहली खेप मस्कट भेजी गई। इस समझौते के तहत अब भारतीय सोने और हीरों की ज्वेलरी को ओमान में ड्यूटी-फ्री बेचा जा सकता है।
पहली खेप की कीमत और महत्व
लगभग 4.5 करोड़ रुपये की इस खेप में हार, चूड़ियां और अंगूठियां शामिल हैं। यह ओमान में पहुंचने वाली पहली खेप है, जहां हाथ से बनी भारतीय ज्वेलरी की भारी मांग है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के पूर्वी क्षेत्र के रीजनल चेयरमैन पंकज पारेख ने बताया कि पहले ओमान में 5% इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी, जो अब CEPA के तहत समाप्त हो गई है।
पश्चिम बंगाल की ज्वेलरी इंडस्ट्री को बढ़ावा
ड्यूटी हटने से पश्चिम बंगाल में हाथ से बनी सोने की ज्वेलरी का निर्यात बढ़ने की संभावना है। वंडर ज्वेल्स के अनिल पुरी ने कहा कि इससे राज्य के ज्वैलर्स और कारीगरों के लिए नए बड़े बाजार खुलेंगे। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 3 सालों में ओमान के लिए भारत का ज्वेलरी एक्सपोर्ट लगभग 150 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
ओमान में नया अवसर
शहर के ज्वैलर्स के अनुसार, वर्तमान में लगभग 80 कंपनियां विदेशी बाजारों में सोने के गहनों का निर्यात करती हैं, जिसमें 90% से अधिक निर्यात दुबई के लिए होता है। CEPA के बाद ओमान में ड्यूटी-फ्री प्रवेश से भारतीय ज्वेलरी उत्पादों के लिए बड़ा और प्रत्यक्ष बाजार खुल गया है। पंकज पारेख ने कहा कि अब बिचौलियों के बिना सीधे शिपमेंट से उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। कोलकाता एयरपोर्ट के कस्टम्स अधिकारी पिछले साल लगभग 1,5000 करोड़ रुपये की ज्वेलरी के एक्सपोर्ट में मदद कर चुके हैं। कस्टम्स कमिश्नर (AA & ACC) आरती सक्सेना ने कहा कि ज्वैलर्स के अनुसार भविष्य में शिपमेंट और बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल के कारीगरों के लिए आर्थिक वृद्धि का बड़ा रास्ता खुल सकता है। इस मौके पर जॉइंट DGFT विष्णु कांत (ITS), कस्टम्स की जॉइंट कमिश्नर शिल्पी श्रीवास्तव (IRS), डिप्टी कमिश्नर रजत घोष व कस्टम्स के अन्य सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए।