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FLC प्रक्रिया के तहत EVM पर मॉक पोल, VVPAT की चेकिंग प्रक्रिया शुरू

स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रहेंगी EVM मशीनें बंगाल में 99.74% EF बांटे गए, 32.1% डिजिटाइज्ड

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं, और इस दिशा में चुनाव आयोग (ECI) ने फर्स्ट-लेवल चेकिंग (FLC) प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया हर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीन की कार्यक्षमता की जांच करने के लिए अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी चुनावी उपकरण सही तरीके से काम करें और किसी प्रकार की तकनीकी समस्या चुनाव के दौरान उत्पन्न न हो। FLC प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को मौजूद रहने के लिए बुलाया जाता है, और हर मशीन की ट्रैकिंग ECI के EVM मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) के जरिए की जाती है। इससे मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है, क्योंकि यह सुनिश्चित होता है कि मशीनें सही तरीके से काम कर रही हैं और नतीजे सटीक रूप से रिकॉर्ड हो रहे हैं। FLC प्रक्रिया से चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता में सुधार होता है। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की रिपोर्ट जारी की गई। राज्य में कुल 7.66 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 7.64 करोड़ एनमरेशन फॉर्म (EF) बांटे गए हैं, जो कुल का 99.74% है। इसके अलावा, अब तक 2.45 करोड़ से ज्यादा EF डिजिटाइज़्ड किए गए हैं, जो कुल EF का 32.01% है।

FLC का मकसद और प्रक्रिया

FLC का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी मशीनें सही ढंग से काम कर रही हैं और चुनाव के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या उत्पन्न न हो। इस प्रक्रिया के तहत निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाए जाते हैं

1 फंक्शनैलिटी चेक: प्रत्येक EVM (कंट्रोल यूनिट और बैलेटिंग यूनिट) और VVPAT यूनिट का पूरी तरह से परीक्षण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे ठीक से काम कर रही हैं।


2. फिजिकल इंस्पेक्शन:
 भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियर मशीनों के सभी पार्ट्स की जांच करते हैं, ताकि यह पक्का हो सके कि सभी उपकरण सही और असली हैं। इसके साथ ही, सफाई और डस्टिंग भी की जाती है।

3. डेटा क्लियरेंस: चुनावी डेटा और रिकॉर्ड को सभी मशीनों से पूरी तरह से हटाया जाता है, ताकि पुराने डेटा से कोई असर न पड़े।

4. मॉक पोल: मशीनों का एक रैंडम प्रतिशत (कम से कम 5%) पर मॉक पोल किए जाते हैं, जिसमें वोट डाले जाते हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि मशीनें पूरी तरह से काम कर रही हैं और नतीजे सही हैं। मॉक पोल के बाद, इन नतीजों को राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधियों को दिखाया जाता है।

5. सीलिंग और स्टोरेज: FLC प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सभी मशीनों को राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पिंक पेपर सील से सील कर दिया जाता है। इसके बाद, इन मशीनों को सुरक्षित स्ट्रांग रूम्स में रखा जाता है, जो 24/7 CCTV निगरानी में होते हैं।


ट्रांसपेरेंसी और ट्रैकिंग

FLC प्रक्रिया में पूरी ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक पार्टियों के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधियों को मौजूद रहने के लिए बुलाया जाता है। इसके अलावा, पूरे FLC प्रोसेस को ECI के EVM मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) सॉफ़्टवेयर द्वारा ट्रैक किया जाता है, जो प्रत्येक मशीन के स्टेटस और मूवमेंट को रिकॉर्ड करता है।

बंगाल चुनाव के लिए तैयारियां

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं और चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है। FLC प्रक्रिया का पूरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव में कोई भी तकनीकी खराबी न आए और मतदाताओं का विश्वास बनाए रखा जा सके।

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