सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने 14 से 17 फरवरी तक आयोजित प्रथम द्वीप पक्षी महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन किया। यह ऐतिहासिक आयोजन क्षेत्र की अद्वितीय पक्षी जैव विविधता और सतत इको-टूरिज्म की संभावनाओं को उजागर करने वाला एक परिवर्तनकारी कार्यक्रम सिद्ध हुआ। चार दिवसीय इस महोत्सव में देश-विदेश के पक्षी प्रेमी, शोधकर्ता और फोटोग्राफर एकत्रित हुए और द्वीपसमूह की विशिष्ट पक्षी संपदा का उत्सव मनाया। इस आयोजन के लिए 9 राज्यों से 31 प्रतिनिधि तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से 6 स्थानीय प्रतिभागियों का चयन किया गया। कार्यक्रम को अंडमान एवियंस क्लब का सहयोग प्राप्त हुआ। महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन 14 फरवरी को मुख्य अतिथि डॉ. चंद्र भूषण कुमार, मुख्य सचिव, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा चिड़ियाटापू में किया गया। उनके साथ प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह में निकोबारी नृत्य, बर्ड डांस तथा वन प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षुओं द्वारा एडिबल-नेस्ट स्विफ्टलेट के संरक्षण पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण के संदेश को एक साथ प्रस्तुत किया। चार दिनों के दौरान प्रतिभागियों ने महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान, माउंट मणिपुर राष्ट्रीय उद्यान, स्टुअर्टगंज आर्द्रभूमि, कालातांग, चिड़ियाटापू जैविक उद्यान, बड़ा बालू, ओग्राब्राज और सिप्पीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर फील्ड ट्रेल्स में भाग लिया। इन भ्रमणों के दौरान प्रतिनिधियों ने 130 से अधिक प्रजातियों का अवलोकन दर्ज किया, जिनमें कई स्थानिक और विशिष्ट द्वीपीय पक्षी शामिल थे। स्थानिक पक्षियों में अंडमान वुडपेकर, अंडमान बुलबुल, अंडमान ड्रोंगो, अंडमान कुकाल, अंडमान सर्पेंट ईगल, अंडमान क्रेक, अंडमान फ्लावरपेक्कर, अंडमान ट्रीपाई, अंडमान शामा, अंडमान कुकूश्राइक, अंडमान ग्रीन पिजन और अंडमान टील विशेष आकर्षण रहे। इसके अतिरिक्त व्हाइट-बेलिड सी ईगल, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, कॉमन स्नाइप, ग्रे-हेडेड लैपविंग, ओरिएंटल स्काईलार्क, आइब्रोड थ्रश तथा अनेक शीतकालीन प्रवासी और तटीय पक्षियों के दर्शन ने प्रत्येक भ्रमण को समृद्ध बनाया। डॉ. धनंजय मोहन ने “पक्षी आधारित इको-टूरिज्म का विकास: उत्तराखंड से सीख” विषय पर व्याख्यान दिया और संरक्षण तथा पर्यटन के संतुलित प्रबंधन पर व्यावहारिक सुझाव साझा किए। वन्यजीव फिल्म निर्माता धृतिमान मुखर्जी ने “मेरा पक्षियों के साथ अनुभव” विषय पर प्रेरणादायक प्रस्तुति दी। डॉ. राजा जयपाल ने “द्वीपीय पक्षियों की जनसंख्या निगरानी: सिद्धांत और विधियां” पर विस्तृत सत्र लिया। शशांक दलवी ने प्रवासी पक्षियों के वैश्विक मार्गों और अंडमान से उनके संबंध पर प्रकाश डाला। डॉ. पी. प्रमोद ने स्थानिक पक्षियों और पक्षियों की ध्वनिक संचार प्रणाली पर दो महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए।
स्थलीय बर्डिंग के साथ-साथ पेलाजिक बर्डिंग भी आयोजित की गई, जिससे प्रतिभागियों को समुद्री पक्षियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का दुर्लभ अवसर मिला। इसके अतिरिक्त तारामंडल अवलोकन सत्र का आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों ने भूमि, समुद्र और आकाश को एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में समझा।
17 फरवरी को मुख्य अतिथि डॉ. धनंजय मोहन की अध्यक्षता में समापन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। इस महोत्सव ने द्वीपसमूह की सांस्कृतिक विरासत को आवास संरक्षण की आवश्यकता से जोड़ा और क्षेत्र में इको-टूरिज्म के लिए एक नया मानदंड स्थापित किया।