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भारत-यूके समझौते के तहत कोलकाता से पहली ज्वेलरी रवाना

तीन वर्षों में 3.5 बिलियन डॉलर पहुंचेगा आभूषण निर्यात

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारत के प्रमुख ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में से एक कोलकाता ने आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के तहत ज्वेलरी निर्यात की पहली खेप को कोलकाता एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह ऐतिहासिक समारोह पश्चिम बंगाल सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तापस रॉय, सीमा शुल्क (Customs) सदस्य योगेंद्र गर्ग (IRS), विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अतिरिक्त महानिदेशक चंद्र कांत मिश्रा (ITS), पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के ब्रिटिश उप उच्चायुक्त डॉ. एंड्रयू फ्लेमिंग, GJEPC के पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष पंकज पारेख और SHEFEXIL की कार्यकारी निदेशक डॉ. देवजानी रॉय, एयरपोर्ट के डायरेक्टर विक्रम सिंह, एएआई कार्गो लॉजिस्टिक्स एंड एलाइड सर्विसेज कंपनी लिमिटेड (AAICLAS) के CEO के. सेल्वाकुमार, क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) हरगोविंद मीना व साथ ही केंद्र सरकार व राज्य सरकार के उच्च पदाधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह आयोजन दिल्ली, मुंबई, सूरत, जयपुर और चेन्नई सहित देशव्यापी पहल का हिस्सा है। इस शुरुआती 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की देशव्यापी खेप में कोलकाता के 6 प्रमुख निर्यातक शामिल हुए। इस ऐतिहासिक खेप में मुख्य रूप से सोने और हीरे के आभूषण भेजे गए हैं।

निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस समझौते से भारतीय ज्वेलरी को यूके के 4 बिलियन डॉलर के आयात बाजार में शून्य-शुल्क (Zero-Duty) पहुंच मिलेगी, जिससे 4% तक का आयात शुल्क खत्म हो जाएगा। GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे अगले तीन वर्षों में यूके को होने वाला निर्यात 754 मिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 3.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।

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