केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर जारी राजनीतिक हलचलों के बीच आये इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हकीम ने कहा कि वह महापौर के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की अनुमति मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा सौंपा।
सात वर्ष के कार्यकाल पर जताया संतोष
इस्तीफे से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में हकीम ने अपने लगभग साढ़े सात वर्षों के कार्यकाल पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोलकाता ने चक्रवात अम्फान और कोविड-19 महामारी जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया, लेकिन केएमसी अधिकारियों और शहरवासियों के सहयोग से इन परिस्थितियों से सफलतापूर्वक निपटा गया। उन्होंने नगर निगम के कर्मचारियों और नागरिकों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
ममता से अनुमति लेकर सौंपा इस्तीफा
हकीम ने कहा कि वह सम्मान और गर्व के साथ पद छोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने पहले पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने केएमसी अध्यक्ष माला रॉय के कार्यालय में अपना इस्तीफा सौंप दिया। सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है।
महापौर के रूप में बनाया इतिहास
नवंबर 2018 में कोलकाता के महापौर बने हकीम स्वतंत्रता के बाद शहर के पहले मुस्लिम महापौर थे। अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें संदेह था कि क्या वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस और देशबंधु चित्तरंजन दास जैसे महान पूर्व महापौरों की विरासत पर खरे उतर पाएंगे। वर्षों तक राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हकीम का इस्तीफा राज्य की राजनीति में नयी चर्चा को जन्म दे सकता है।
3 दिसंबर 2018 को बने थे मेयर
"फिरहाद हकीम ने 3 दिसंबर 2018 को कोलकाता के 38वें मेयर के रूप में शपथ ली थी। लगभग साढ़े सात वर्षों तक इस पद पर रहने के बाद उन्होंने 5 जून 2026 को इस्तीफा दे दिया।"