टॉप न्यूज़

जेल की जगह जुर्माना? जन विश्वास विधेयक पर विपक्ष का तीखा हमला

लोकसभा में शुक्रवार को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया

लोकसभा में शुक्रवार को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया, जिसे लेकर सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे कारोबार और आम जनजीवन को सरल बनाने वाला बड़ा सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने इसके प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य छोटे-मोटे और तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, नियमों को सरल बनाना और भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इस विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों से जुड़े 79 केंद्रीय कानूनों के कुल 784 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित है। इनमें 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाने और 67 प्रावधानों को आम जनजीवन को आसान बनाने के लिए बदला जाएगा।

प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि सभी मामलों में आरोपी केवल जुर्माना देकर बच निकलेंगे। उन्होंने कहा कि सजा और जुर्माना अपराध की गंभीरता के अनुसार तय किया जाएगा तथा अपील की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। उनके अनुसार, इस कदम से अदालतों पर बोझ कम होगा और कारोबार करने में सहूलियत बढ़ेगी।

विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद कडियम काव्या और जी के पदवी ने कहा कि यह प्रस्ताव संविधान की मूल संरचना के विपरीत है और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने मांग की कि विधेयक को पुनः चयन समिति या संसदीय समिति के पास भेजा जाए ताकि इसके प्रावधानों की दोबारा समीक्षा हो सके।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि समिति में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला है और किसी विधेयक को दोबारा समिति में भेजने की परंपरा नहीं रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन बताया।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों में बदलाव नहीं किया जाता। वहीं अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कारोबार सुगमता पर लगातार काम हुआ है और छोटे-छोटे मामलों में जेल भेजने की व्यवस्था खत्म करना आम जनता के हित में है।

SCROLL FOR NEXT