निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नैहाटी : पश्चिम बंगाल में 'एसआईआर' (SIR) नोटिस और उसके बाद होने वाली सुनवाई का आतंक अब जानलेवा साबित होने लगा है। ताजा और हृदयविदारक घटना उत्तर 24 परगना जिले के नैহাटी विधानसभा क्षेत्र से सामने आई है, जहाँ जेठिया क्षेत्र की निवासी रत्ना चक्रवर्ती की चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मिली जानकारी के अनुसार, रत्ना चक्रवर्ती को चुनाव आयोग की ओर से 'एसआईआर' (SIR) के तहत सुनवाई के लिए ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय बुलाया गया था। पिछले कुछ समय से पूरे राज्य में इस तरह के नोटिस को लेकर आम जनता के बीच गहरा डर और असमंजस का माहौल है। लोगों को डर है कि इस प्रक्रिया के जरिए उनका नाम मतदाता सूची से काट दिया जाएगा या उनकी नागरिकता/पहचान पर आंच आएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आज जब रत्ना चक्रवर्ती बीआईओ कार्यालय में सुनवाई के लिए कतार में खड़ी थीं, तब वे मानसिक रूप से काफी तनाव में दिख रही थीं। सुनवाई प्रक्रिया के दौरान ही उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे वहीं गिर पड़ीं। कार्यालय में मौजूद लोगों और परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उनकी मौत का प्राथमिक कारण 'कार्डियक अरेस्ट' या दिल का दौरा बताया है।
इस घटना को लेकर स्थानीय तृणमूल विधायक सनत दे और तृणमूल नेतृत्व ने इस मौत के लिए सीधे तौर पर चुनाव आयोग के 'तुगलकी' व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगयाया कि चुनाव आयोग "दिल्ली के जमींदारों" (केंद्र सरकार) के इशारे पर काम कर रहा है। बिना किसी ठोस आधार के आम नागरिकों को नोटिस भेजकर घंटों लाइनों में खड़ा किया जा रहा है, जिससे बुजुर्ग और बीमार लोग मानसिक तनाव झेल रहे हैं। वहीं विधायक ने मृतका के परिवार को सांत्वना देते हुए सवाल उठाया है कि, "चुनाव आयोग का यह गंदा खेल आखिर कितनी और जानें लेगा? क्या एक आम नागरिक की पहचान साबित करने की प्रक्रिया किसी की जान से ज्यादा कीमती है?"
रत्ना चक्रवर्ती की मृत्यु के बाद नैहाटी और आसपास के इलाकों में शोक के साथ-साथ तनाव का माहौल है। आरोप लगाया जा रहा है कि जानबूझकर उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है जहाँ से विशेष राजनीतिक प्रभाव पड़ता है । प्रशासन की ओर से अभी इस घटना पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने मृतक परिवार को न्याय दिलाने और आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।