शिवभक्ति और ट्रेकिंग का था जुनून
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक तरफ भगवान शिव की भक्ति और मानसरोवर यात्रा का अटूट सपना, तो दूसरी तरफ नेपाल की वादियों में अचानक आई कुदरत की मार—इस मर्मस्पर्शी और दुखद घड़ी ने बेहला निवासी 63 वर्षीय रंजीत हावलादार के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी रंजीत 'चलो जाई ट्रैवल क्लब' के साथ नेपाल की यात्रा पर गए थे, लेकिन वहां आई भीषण आपदा के बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। पर्णश्री के रहने वाले रंजीत एक उत्साही ट्रेकर थे और अकेले यात्रा करने का शौक रखते थे। आपदा से ठीक एक रात पहले ही उनकी अपनी बेटी सुनंदा से आखिरी बार बात हुई थी, जिसके बाद से उनका फोन पूरी तरह बंद है और संपर्क टूट चुका है।
बेटी ने सरकार से लगाई गुहार
मुंबई में रहने वाली उनकी इकलौती बेटी सुनंदा पिता के लापता होने की खबर मिलते ही तुरंत कोलकाता दौड़ी चली आईं। उन्होंने टूर ऑपरेटर के कार्यालय और स्थानीय पुलिस से लगातार संपर्क साधा है, लेकिन अब तक उनके पिता की स्थिति या ठिकाने को लेकर कोई पुख्ता जानकारी हाथ नहीं लगी है। घर पर उनकी बुजुर्ग पत्नी इस अनहोनी के डर से बेसुध हैं। सुनंदा ने दर्द भरे शब्दों में कहा कि आपदा के बाद से वह अपने पिता से संपर्क नहीं कर पाई हैं, क्योंकि वह होटल लौटने पर वाई-फाई के जरिए ही कॉल किया करते थे। अब इस संकट की घड़ी में पूरा परिवार राज्य और केंद्र सरकारों से यह पुरजोर अपील कर रहा है कि वे नेपाल के अधिकारियों के साथ तुरंत तालमेल बैठाएं, ताकि उनके पिता को सुरक्षित बचाकर जल्द से जल्द उनके घर लाया जा सके।