सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में फर्जी लोकल सर्टिफिकेट रैकेट का खुलासा प्रशासन और द्वीप समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पुलिस द्वारा 17 जाली लोकल सर्टिफिकेट बरामद किए जाने और चार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग सरकारी सुविधाओं और जहाज यात्रा रियायतों का अवैध रूप से लाभ उठाने के लिए किया जा रहा था, जो केवल वास्तविक द्वीपवासियों के लिए निर्धारित हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा करता है, बल्कि वास्तविक द्वीपवासियों के अधिकारों, रोजगार और भविष्य पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अंडमान निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने कहा कि यह मुद्दा केवल फर्जी प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अवैध प्रव्रजन की समस्या से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले इस विषय को पुलिस महानिदेशक सहित उच्च स्तर पर उठाया गया था। भास्कर ने सवाल किया कि कोई वैध नागरिक फर्जी लोकल सर्टिफिकेट क्यों लेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे दस्तावेज अक्सर अवैध प्रव्रजकों को वैध बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। उन्होंने इसे “ओपन एंड शट केस” बताते हुए आरोप लगाया कि राजस्व अधिकारियों की भूमिका के बिना ऐसे प्रमाणपत्र जारी होना संभव नहीं है। निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए भास्कर ने मामले को सीआईडी या सीबीआई को सौंपने की आवश्यकता बताई। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वतंत्र जांच के अभाव में यह मामला दब सकता है। उन्होंने कहा कि यह रैकेट केवल हट बे जैसे किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे द्वीपसमूह में फैले एक बड़े घोटाले का हिस्सा हो सकता है।
अंडमान-निकोबार में मतदाता सूची में अवैध नाम जोड़ने का डर
उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी लोकल सर्टिफिकेट का उपयोग नौकरियां हासिल करने के लिए भी किया जाता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब अंडमान-निकोबार में बड़े रणनीतिक निवेश किए जा रहे हैं, इस तरह के रैकेट को जड़ से समाप्त करना अत्यंत आवश्यक है। इसी बीच, भाजपा अंडमान-निकोबार प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार तिवारी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि लोकल सर्टिफिकेट और आईलैंडर कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मतदाता सूची में अवैध रूप से नाम जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से सख्त सत्यापन और किसी भी संदेह की स्थिति में नाम शामिल न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से बारहवीं तक लगातार द्वीपों में शिक्षा प्राप्त करने वाले वास्तविक द्वीपवासी बच्चों को ही रोजगार का अधिकार मिलना चाहिए और फर्जी प्रमाणपत्र उनके भविष्य पर सीधा प्रहार हैं। इसे गंभीर अपराध बताते हुए उन्होंने प्रशासन और जनता दोनों से सतर्क रहने और संदिग्ध मामलों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह खुलासा प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और समाज के लिए एक चेतावनी है। यह मुद्दा केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि द्वीपवासियों के अधिकारों, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।