अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच खुला सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है। अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर 30 से अधिक मिसाइलें दागी हैं। तेहरान और जोम्हौरी इलाके में कई मिसाइलें गिरने की खबर है। ईरान के परमाणु ठिकानों और राष्ट्रपति भवन को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। अमेरिका-इज़राइल ने इस सैन्य अभियान को “Shield of Judah” नाम दिया है।
ईरान से सामने आए कई वीडियो में विस्फोट और धुएं के गुबार देखे जा सकते हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इज़रायली सेना ने Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के खुफिया मुख्यालय को निशाना बनाया है। मध्य तेहरान, जोम्हौरी और आसपास के इलाकों पर भी मिसाइल हमले हुए हैं। देश के प्रमुख धार्मिक शहर कुम सहित इस्फ़हान, करमनशाह, तबरीज और करज में भी हमलों की खबर है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के लगभग 30 शहरों को निशाना बनाया गया है। ईरान के इंटेलिजेंस ब्यूरो और गृह मंत्रालय से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए जाने की सूचना है। अमेरिकी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति Donald Trump के अनुसार ये हमले अगले चार दिनों तक जारी रह सकते हैं।
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले ही ईरान पर कार्रवाई की चेतावनी दे चुके थे। अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी तैनाती बढ़ा चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत इज़राइल छोड़ने की सलाह भी दी थी। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद बन गया है। ईरान इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है और इस पर किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार करता रहा है।
ईरान की दो-टूक: मिसाइल कार्यक्रम पर नहीं होगी चर्चा
ईरान का कहना है कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। तेहरान का दावा है कि जून 2025 में इज़राइल और अमेरिका द्वारा कथित रूप से उसके परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के दौरान उसकी मिसाइल क्षमता ही उसकी सुरक्षा का आधार बनी। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी—मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय समूहों पर कोई चर्चा नहीं होगी। उनके अनुसार, मिसाइल क्षमता छोडना देश को कमजोर करना होगा।
मोबाइल नेटवर्क ठप होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इज़राइली हमलों में ईरान का मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इज़राइल का दावा है कि “Shield of Judah” नामक इस अभियान की योजना कई महीनों से तैयार की जा रही थी और इसकी टाइमिंग पहले से तय थी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन का एक प्रमुख उद्देश्य इज़राइल के होम फ्रंट के लिए संभावित खतरों को खत्म करना है, जिसमें मिसाइल लॉन्चर और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) बेस को निशाना बनाना शामिल है।
स्कूल-कॉलेज बंद, देशभर में हाई अलर्ट
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। लोगों को भीड़ में इकट्ठा होने से मना किया गया है और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी प्रमुख शहरों में हाई अलर्ट जारी है और नागरिकों को अगले आदेश तक घरों में रहने को कहा गया है। सड़कों पर सेना और स्थानीय पुलिस बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। साथ ही, ईरान की थल, जल और वायु सेनाओं ने संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।