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EXPLAINED : LPG संकट: मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब भारत की रसोई और कारोबार पर

घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन बाद, कमर्शियल गैस की सप्लाई पर पाबंदी

Bishakhaa Tiwari

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सीधे भारत की रसोई और व्यापार को प्रभावित कर रहा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो तेल और गैस के वैश्विक परिवहन का अहम मार्ग है, में व्यवधान से एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमत और उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर और सऊदी अरब से आयात करता है, इसलिए हालिया हालात से घरेलू गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।

सरकार और तेल कंपनियों ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के समय को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि उपभोक्ता पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के बाद कम से कम 25 दिन पूरे होने पर ही नया सिलेंडर बुक कर पाएंगे। यह कदम जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, डिलीवरी प्रक्रिया को भी कड़ा किया गया है। कई जगहों पर सिलेंडर की डिलीवरी के समय ओटीपी और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिए गए हैं ताकि गैस का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।

एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। घरेलू 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की वृद्धि हुई है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम करीब 115 रुपये बढ़ाए गए हैं। यह पिछले एक साल के दौरान दूसरी बड़ी वृद्धि है, क्योंकि अप्रैल में भी घरेलू सिलेंडर की कीमत करीब 50 रुपये बढ़ाई गई थी। हालांकि सरकार का कहना है कि इसके बावजूद भारत में एलपीजी की कीमत पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका और पाकिस्तान की तुलना में कम है।

कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है। कई राज्यों में रेस्टोरेंट, होटल और छोटे व्यवसायों को मिलने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति कम कर दी गई है। पुणे, मुंबई और नागपुर में कमर्शियल गैस की उपलब्धता घट गई है, जिससे एलपीजी से चलने वाले गैस शमशान घाट को भी स्थाई रूप से बंद करना पड़ा। पंजाब में 8 मार्च से कमर्शियल और औद्योगिक गैस सिलेंडरों की डिस्पैच रोक दी गई है। तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई शहरों में भी नई सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अस्थिरता बनी रहेगी और भारत को घरेलू और कमर्शियल दोनों सेक्टर में बचाव के उपायों को लगातार लागू करना होगा।

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