देश के कई राज्यों में आने वाले हफ्तों में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। इसकी मुख्य वजह हाल ही में Supreme Court of India का वह आदेश है, जिसमें राज्यों को “कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ” लागू करने और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के लंबित घाटे को तय समयसीमा में खत्म करने का निर्देश दिया गया है।
यह संभावित बढ़ोतरी ऐसे समय पर आ रही है जब एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे बिजली की वास्तविक लागत के अनुसार टैरिफ तय करें और “रेगुलेटरी एसेट्स” यानी बकाया घाटे को खत्म करने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करें।
रेगुलेटरी एसेट्स वह अंतर होता है, जब डिस्कॉम्स की लागत (ACS) उनकी आय (ARR) से ज्यादा होती है। ऐसे में घाटे को तुरंत उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय बाद के लिए टाल दिया जाता है।
फिलहाल यह बकाया करीब ₹3 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने इसे “रेगुलेटरी फेल्योर” और “रेगुलेटरी कैप्चर” जैसे गंभीर शब्दों में भी संबोधित किया था।
डेटा के अनुसार, Delhi में ही लगभग ₹38,552 करोड़ का रेगुलेटरी एसेट बकाया है।
Appellate Tribunal for Electricity ने Delhi Electricity Regulatory Commission को तीन हफ्तों के भीतर इस बकाया की वसूली शुरू करने का आदेश दिया है।
इसके तहत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में “रेगुलेटरी सरचार्ज” जोड़ा जा सकता है, जिसे सात साल में वसूला जाएगा। दिल्ली में 2014-15 के बाद से बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
दूसरी ओर Rajasthan ने इस दिशा में कुछ प्रगति दिखाई है।
FY2023 में ₹53,824 करोड़ का बकाया
FY2027 तक घटकर ₹33,298 करोड़ होने का अनुमान (करीब 38% कमी)
अक्टूबर 2025 में राज्य ने ₹0.42 से ₹0.72 प्रति यूनिट तक का सरचार्ज लागू किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹0.56–₹0.86 प्रति यूनिट कर दिया गया।
सिर्फ छह महीनों में ₹3,341 करोड़ की वसूली हुई, जबकि अगले वित्त वर्ष में ₹8,663 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है।
शुरुआती दौर में बिजली बिल बढ़ सकते हैं, लेकिन लंबे समय में फायदा भी संभव है।
ब्याज (कैरीइंग कॉस्ट) FY2024 में ₹0.68 प्रति यूनिट से घटकर FY2031 तक ₹0.03 हो सकता है
इससे भविष्य में बिजली दरों में स्थिरता आ सकती है
राज्यों की प्रतिक्रिया अभी तक अलग-अलग रही है, लेकिन विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब तेजी से फैसले होने की उम्मीद है।
आने वाले समय में बिजली, गैस और ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी आम लोगों के बजट पर असर डाल सकती है।