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कष्ट सहकर बुजुर्ग पहुंचे सुनवाई केंद्र, जताया आक्रोश

सन्मार्ग संवाददाता

हुगली : चुंचुड़ा नगरपालिका के 12 नंबर वार्ड के निवासी 90 वर्षीय प्रशांत कुमार मित्र और उनकी 77 वर्षीय पत्नी शिखा मित्र को शारीरिक असमर्थता के बावजूद सुनवाई केंद्र तक आना पड़ा। एसआईआर सुनवाई के दौरान बुजुर्गों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा। प्रशांत मित्र की दोनों टांगें टूटी हुई हैं और उन्हें चलने के लिए बैसाखी का सहारा लेना पड़ता है।

जीवनभर की परेशानियां बढ़ीं

शिखा मित्र ने बताया कि उनका जीवन अब तक कभी इतना कठिन नहीं रहा। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि वोटर सूची से उनका नाम कट गया तो बैंक और पेंशन जैसी जरूरी सुविधाएँ बंद हो सकती हैं। बुजुर्गों ने सवाल उठाया कि सात पीढ़ियों से उसी स्थान पर रहने के बावजूद उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रशासनिक कार्यों के लिए सुनवाई केंद्र आने-जाने में उन्हें बार-बार 600 रुपये टोटो किराया देना पड़ता है, जो उनके लिए बेहद कठिन है।

प्रशासनिक प्रक्रिया ने बढ़ाई परेशानी

बुजुर्गों की शारीरिक असमर्थता के बावजूद सुनवाई केंद्र आना उनके लिए भारी संघर्ष साबित हुआ। प्रशांत और शिखा दोनों ने प्रशासन से आग्रह किया कि उनके जैसे बुजुर्गों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे खर्च और कठिन यात्रा उनके जीवन को और कठिन बना रहे हैं।

स्थानीय लोगों में रोष

बुजुर्गों की कठिनाइयों और उनके संघर्ष को देखकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हो गया है। कई लोग प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि बुजुर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएँ और उन्हें बार-बार लंबी यात्रा न करनी पड़े। प्रशांत और शिखा मित्र ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पीड़ा केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि ऐसे कई बुजुर्ग नागरिक हैं, जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते असमर्थ होने के बावजूद परेशान हैं। उन्होंने प्रशासन से निवेदन किया कि उन्हें सुरक्षा, सम्मान और सुविधा के साथ अपने अधिकारों तक पहुँच प्रदान की जाए। बुजुर्गों की यह संघर्ष गाथा प्रशासन के लिए चेतावनी भी है कि छोटे-छोटे नियमों में लचीलेपन की आवश्यकता है, ताकि समाज के कमजोर और बुजुर्ग वर्ग को नुकसान न पहुंचे।

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