स्कूलों में पहले से है शिक्षकों की कमी
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी के बीच अब चुनाव ड्यूटी को लेकर नयी चिंता सामने आयी है। आशंका जताई जा रही है कि ECI की ओर से सभी स्थायी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को चुनाव कार्य में लगाया जा सकता है, जिससे स्कूलों का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। 2016 के भर्ती पैनल को रद्द किए जाने के बाद से राज्य के कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे में पढ़ाई-लिखाई पहले ही प्रभावित है और अब चुनावी जिम्मेदारियों का दबाव स्थिति को और कठिन बना सकता है।
चुनाव ड्यूटी के लिए स्थायी कर्मचारियों की सूची तैयार
सूत्रों के अनुसार, पहले पारा-शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों को चुनाव कार्य में लगाने की योजना थी, लेकिन कानूनी बाधाओं के चलते यह संभव नहीं हो पाया। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने सभी स्थायी शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। गत नवंबर से मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में कई शिक्षक पहले ही बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में लगे हुए हैं। अब अतिरिक्त चुनाव ड्यूटी की संभावना से शिक्षण कार्य लगभग ठप पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
परीक्षा के समय बढ़ीं मुश्किलें और चिंता गहराई
अप्रैल महीने में स्कूलों में अंतिम परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन कई शिक्षक चुनाव प्रशिक्षण में व्यस्त होने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा दोनों प्रभावित हो रही है। शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिकांश कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर भेज दिया गया, तो स्कूलों को चलाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग से इस मामले में संतुलित नीति अपनाने की मांग की है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संभावित स्थिति को लेकर शिक्षा जगत में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।