निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा: दुर्गापूजा के दौरान केवल बाहरी उल्लास ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और साधना का होना भी अत्यंत आवश्यक है। यह विचार भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज (कार्तिक महाराज) ने गुरुवार को हावड़ा के डुमुरजला स्टेडियम स्थित हॉकी मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा उन्हें 'पश्चिम बंगाल दुर्गापूजा समन्वय समिति' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण और मां दुर्गा की अंतर्निहित आराधना पर जोर
कार्तिक महाराज ने कहा कि दुर्गापूजा सनातन हिंदू धर्म के विभिन्न आध्यात्मिक पहलुओं को दर्शाने वाला महान पर्व है। पूजा आयोजकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि उत्सव और आनंद मनाना सही है, लेकिन इसके साथ आत्मसाधना को भी महत्व दिया जाना चाहिए। दुर्गापूजा मूल रूप से शक्ति की आराधना है और शक्ति की साधना बिना संयम और तपस्या के अधूरी है। इसे केवल भव्य रोशनी, आतिशबाजी और मनोरंजन तक सीमित न रखकर मां दुर्गा के अवतरण के वास्तविक उद्देश्य को समझना चाहिए।
खान-पान विवाद पर स्पष्ट संदेश और सरकार का आभार
दुर्गापूजा के दौरान मछली-मांस के सेवन को लेकर चल रही बहस पर कार्तिक महाराज ने कहा कि इस विषय पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग व्यक्तियों की प्रवृत्ति, परंपरा और आवश्यकता के अनुसार आहार की प्रकृति भिन्न हो सकती है। अंत में, उन्होंने पूजा समितियों में बेहतर समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार भी जताया।