जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण (डीआरएटी) और ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) को अब एक ही छत के नीचे ला दिया गया है। कोलकाता के जीवन सुधार भवन में इसके नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया। यह बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही फैसला लेने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। इसके उद्घाटन के मौके पर एक समारोह का आयोजन किया गया।
यहां उल्लेखनीय है कि ऋृणों की शीघ्र वसूली की बढ़ती आवश्यकता और बैंकों की बड़ी वित्तीय हिस्सेदारी को देखते हुए पुराने अधिनियम को बदल कर ऋृण वसूली और दिवालियापन अधिनियम 1993 कर दिया गया। इस अधिनियम में बैंकों के ऋृणों से संबंधित मुकदमों के लिए विशेष अधिकरणों की स्थापना का प्रावधान किया गया। इसके तहत पूरे देश में ऋृण वसूली अधिकरण स्थापित किए गए और उनके शीर्ष पर अपीलीय अधिकरण को रखा गया। ऋृण वसूली अधिकरण के आदेश के खिलाफ अपीलीय अधिकरण में अपील की जाती है। इसका मकसद बैंकों के हितों की रक्षा करना और उधार लेने वालों के अधिकार को कुचले जाने से बचाना है। इन दोनों के बीच संलुलन बनाये रखने के लिहाज से यह कदम उठाया गया है। कोलकाता अपीलीय अधिकरण के अधिकार क्षेत्र में कटक, गुवाहाटी आदि तक है। इससे बैंक और ऋृण संबंधी मुकदमा करने वाले एडवोकेटों को भी काम करने में सहूलियत होगी।