डॉ. सरिता बुधू 
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जड़ों से जोड़ना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है : डॉ. सरिता बुधू

कहा, हमारे लिए भारत दूसरी मातृभूमि है

कोलकाता : मॉरीशस की भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की अध्यक्ष डॉ. सरिता बुधू ने कहा है कि लोगों को उनकी जड़ों और पूर्वजों से जोड़ना ही अब उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। शुक्रवार को वे मॉरीशस के कोलकाता स्थित कौंसुल कपिल कौल के साथ अचानक कोलकाता प्रेस क्लब पहुंचीं और सरस्वती पूजा में शामिल हुईं।

लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज की पूर्व छात्रा डॉ. बुधू भारत को अपना “दूसरा घर” मानती हैं। इस बार वह एशियाटिक सोसाइटी के निमंत्रण पर कोलकाता आई थीं। उन्होंने भारत द्वारा मॉरीशस को वर्षों से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। 'सन्मार्ग' से बातचीत में उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंधों को रेखांकित किया। वे मॉरीशस के पूर्व उपप्रधानमंत्री डॉ. हरीश बुधू की पत्नी भी हैं और स्वयं एक जानी-मानी सांस्कृतिक व्यक्तित्व हैं।

डॉ. बुधू ने कहा, “करीब 250 वर्ष पहले हमारे पूर्वज भारत से मजदूर बनकर मॉरीशस गए थे। बिहार और पूर्वांचल से गए लोगों ने वहां अपनी मेहनत से पहचान बनाई और आज देश के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत हमारे पूर्वजों की पवित्र भूमि है, हमारा दूसरा घर है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर में बिहार और अविभाजित बंगाल से हजारों लोगों को व्यापारिक उद्देश्यों के लिए मॉरीशस भेजा गया था।

प्रेस क्लब में महाप्रसाद ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि बिहारी समाज ने आज अपनी अलग पहचान बना ली है और एक राष्ट्र के संचालन में सहभागी है। उन्होंने कहा, “अब मेरा प्रयास है कि मॉरीशस और भारत—दोनों जगह लोगों को उनके पूर्वजों की जड़ों से फिर से जोड़ा जाए।”

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