पटना : चर्चित शिक्षकों खान सर (फैजल खान) और रौशन सर (रौशन आनंद) से जुड़े विवाद पर पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र को "मलयुद्ध" का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए।
पप्पू यादव ने कहा कि दोनों शिक्षक अपने-अपने क्षेत्र में सम्मानित हैं और उनके ज्ञान या योगदान पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।
पप्पू यादव ने कहा, "प्रतिस्पर्धा होना कोई गुनाह नहीं है। एक शिक्षक को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिलता है और दूसरे शिक्षक ने भी पिछले कुछ वर्षों में बेहतर तरीके से छात्रों तक ज्ञान पहुंचाया है। दोनों के ज्ञान और मेहनत पर कोई सवाल नहीं है।"
उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस विवाद का आनंद लेने और प्रतिष्ठित संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
सांसद ने कहा कि जिस तरह से दोनों शिक्षकों को लेकर माहौल बनाया जा रहा है, वह उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, "कुछ लोग इस मामले में मजे ले रहे हैं। दोनों शिक्षकों को अपराधियों की तरह ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए।"
घटना में गोली चलने के मामले पर पप्पू यादव ने कहा कि न तो खान सर ने गोली चलाई और न ही रौशन सर इस घटना में सीधे तौर पर शामिल थे।
उन्होंने कहा, "गार्ड द्वारा गोली चलाना गलत है, लेकिन रौशन सर को सीधे जेल भेज देना भी उचित नहीं है।"
पप्पू यादव ने शिक्षा जगत में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक और डॉक्टर जैसे पेशों में बाउंसर और शक्ति प्रदर्शन की संस्कृति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "एक शिक्षक और डॉक्टर को बाउंसर की क्या जरूरत है? इस तरह की टकराव की क्या आवश्यकता है?"
सांसद ने पूरे विवाद को अहंकार की लड़ाई करार देते हुए कहा कि यह संघर्ष शिक्षा या छात्रों के हित से ज्यादा प्रतिष्ठा और वर्चस्व की लड़ाई जैसा दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, "यह अहंकार की लड़ाई है। कौन बड़ा है और कौन ज्यादा प्रभावशाली है, इसी सोच ने विवाद को जन्म दिया है।"
गौरतलब है कि हाल के दिनों में खान सर और रौशन सर से जुड़ा विवाद बिहार के शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।