निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से पहले परिवहन व्यवस्था को लेकर संकट गहराता नजर आ रहा है। चुनाव कार्यों के लिए अधिगृहित की गई निजी बसों के मालिकों ने अग्रिम राशि (Advance Payment) न मिलने पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। बस मालिकों का आरोप है कि राज्य निर्वाचन आयोग और परिवहन विभाग के बार-बार आश्वासन के बावजूद उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जिलों के बीच भेदभाव का आरोप
29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव के लिए बसों को 26 अप्रैल से रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। बस मालिकों के संगठनों का दावा है कि जहां हुगली और हावड़ा जैसे जिलों में कुछ मालिकों को अग्रिम राशि मिल गई है, वहीं कोलकाता, नदिया और उत्तर 24 परगना के मालिक अब भी खाली हाथ हैं। बस सिंडिकेट के सचिव तपन बनर्जी ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा, “एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में चुनाव आयोग का यह दोहरा रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इस भेदभाव को स्वीकार नहीं करेंगे।”
बढ़ता आर्थिक बोझ और चेतावनी
बस मालिकों का कहना है कि उन्हें अपने पास से श्रमिकों का वेतन, ईएमआई और रखरखाव का खर्च उठाना पड़ रहा है। प्रथम चरण (23 अप्रैल) के दौरान रायगंज, बालुरघाट और मेदिनीपुर जैसे इलाकों में इस्तेमाल की गई कई बसों का भुगतान भी अभी तक लंबित है। संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 29 अप्रैल तक अधिगृहित की गई बसों और मिनी बसों का अग्रिम भुगतान तुरंत उनके बैंक खातों में नहीं किया गया, तो भविष्य में चुनावी कार्यों के लिए वाहन उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा।
इस विवाद के कारण 6 मई तक आम यात्रियों को भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में निजी बसें सड़कों से नदारद रहेंगी।