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धराली आपदा : सेना के 7 जवान और एक जेसीओ, 40 मजदूरों की तलाश जारी

एनडीआरएफ टीम की मदद के लिए शव-खोजी कुत्ते, पशु चिकित्सक भेजे गये

उत्तरकाशी/नयी दिल्ली/देहरादून : उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित धराली गांव में जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए जारी अभियान के तीसरे दिन गुरुवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के 69 बचावकर्मियों का एक दल शामिल हुआ। इसके अलावा दो शव-खोजी कुत्ते और पशु चिकित्सकों की एक टीम भी बचाव कार्य में सहयोग के लिए पहुंची है। इस बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने बताया कि उसके जवानों ने गंगोत्तरी से मुखवा के बीच फंसे कुल 307 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया है और उन्हें हरसिल ले जाया जा रहा है जबकि सेना ने कहा कि अभी भी उसके 7 जवान और एक जेसीओ लापता हैं। इनके अलावा कई पर्यटकों के साथ 30 से 40 मजदूर भी लापता हैं।

एनडीआरएफ पहली बार शव-खोजी कुत्तों की मदद ले रहा

एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) गंभीर सिंह चौहान ने कहा आपदा से हुए नुकसान का विश्लेषण किया जा रहा है। उत्तरकाशी को जोड़ने वाली सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी हैं हालांकि हमारी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को बचाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह 2006 में गठित एनडीआरएफ के 19 साल के इतिहास में पहली बार है, जब किसी अभियान में शव-खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। शव-खोजी कुत्तों के अलावा हमारे पास चार खोजी कुत्ते भी हैं, जो जीवित बचे लोगों की तलाश में मदद करेंगे।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

एनडीआरएफ की पहली टुकड़ी बुधवार शाम धराली पहुंची

उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ के 69 कर्मियों की टीम धराली में राहत एवं बचाव कार्यों को अंजाम दे रही है। एनडीआरएफ की पहली टुकड़ी बुधवार शाम धराली पहुंची, जहां मंगलवार दोपहर अचानक आयी बाढ़ से भारी तबाही मची है। आईटीबीपी, सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की बचाव टीमें भी क्षेत्र में काम कर रही हैं। चौहान ने बताया कि एनडीआरएफ ने आपदा क्षेत्र में क्यूएडी (क्विक डिप्लॉयमेंट एंटीना) और सैटेलाइट फोन की तैनाती के साथ एक संचार केंद्र स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि मवेशियों को बचाने के लिए कुछ पशु चिकित्सकों को भी धराली भेजा गया है। चौहान ने कहा, “हम अधिक से अधिक लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रभावितों में विभिन्न राज्यों से आये तीर्थयात्री शामिल

प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि गंगोत्तरी तथा आसपास के क्षेत्रों में फंसे हुए करीब 300 लोगों को अब तक हर्षिल लाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी लोग सुरक्षित हैं। इन लोगों में विभिन्न राज्यों से आए हुए तीर्थयात्री शामिल हैं। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, असम, कर्नाटक, तेलंगाना, और पंजाब के श्रद्धालु शामिल हैं। उन्नत और आधुनिक उपकरणों को धराली तक पहुंचाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं ताकि मलबे में दबे लोगों की तलाश का काम रफ्तार पकड़ सके।

घायलों को सुरक्षित निकाला गया

सैलाब ने दक्षिण हरसिल स्थित सेना शिविर नष्ट कर दिया

इस बीच सेंट्रल कमांड के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने कहा कि बाढ़ के लगभग डेढ़ घंटे बाद एक और बाढ़ और मलबे का सैलाब आया, जिसने दक्षिण हरसिल में स्थित सेना शिविर को नष्ट कर दिया है। इस कारण धराली का हर तरह से संपर्क कट गया है। शुरुआती बचाव कार्य के लिए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हर्षवर्द्धन, 14 जम्मू-कश्मीर राइफल्स और उनके 150 जवानों को घटनास्थल पर तैनात किया गया। जब मलबा हमारे दक्षिणी शिविर में घुसा, तो 7 जवान और एक जेसीओ लापता हो गये।

धराली का संपर्क बहाल करने की कोशिश

फिलहाल हम धराली गांव का संपर्क बहाल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि हरसिल से धराली की यात्रा आसान हो सके। सेना कमांडर ने बताया कि धराली में आईटीबीपी, एनडीआरएफ और भारतीय सेना रेस्क्यू कार्य में जुटी है। भारी बारिश और भूस्खलन से बंद हाईवे और बह गयी सड़कें चुनौती बन रही हैं। सेना कमांडर ने आगे कहा कि रेस्क्यू टीमों को धराली पहुंचने में देरी हो रही है। वायुसेना भी रेस्क्यू में जुटी है। एमआई-17 और एएलएच एमके-III हाई अलर्ट पर हैं। इसके अलावा कई विमान देहरादून में मौजूद हैं, जो राहत कार्य में हर संभव मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बचाव कार्यों की निगरानी के लिए बुधवार से यहां डेरा डाले हुए हैं।

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