सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दुर्गा पूजा में अब एक महीना भी नहीं बचा है, ऐसे में पश्चिम बंगाल के ढाकियों के बीच उत्साह से ज्यादा चिंता और सतर्कता का माहौल है। हर साल की तरह इस बार भी प्रह्लाद दास और उनके पिता लालू दास मुंबई की ओर रवाना होने वाले हैं, लेकिन इस बार तैयारी में ढोल के साथ-साथ दस्तावेजों की फाइलें भी शामिल हैं। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा निवासी प्रह्लाद पिछले कई वर्षों से मुंबई के पवई में पूजा के दौरान ढाक बजाते हैं लेकिन इस बार उन्हें और उनके जैसे सैकड़ों ढाकियों को डर सता रहा है कि कहीं उन्हें बांग्लादेशी समझकर हिरासत में न ले लिया जाए। पिछले कुछ महीनों में हरियाणा, दिल्ली, गुजरात जैसे राज्यों में बंगाल से गये मजदूरों को पुलिस द्वारा रोके जाने, प्रताड़ित करने और यहां तक कि देश से बाहर भेजने की घटनाएंं सामने आयी हैं। कई मामलों में आधार, वोटर आईडी और जमीन के कागजात होने के बावजूद उन्हें बांग्लादेशी बताया गया। इन्हीं घटनाओं के चलते इस बार ढाकी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के साथ यात्रा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रह्लाद के पिता लालू दास लोखंडवाला में गायक अभिजीत भट्टाचार्य की पूजा में प्रस्तुति देंगे। उनकी टीम 24 सितंबर को रवाना होगी।
दस्तावेजों के बावजूद ढाकियों में है डर
बांकुड़ा, सालतोड़ा जैसे इलाकों के कई ढाकियों ने इस बार यात्रा नहीं करने का निर्णय लिया है। दो महीने पहले बांकुड़ा के कुछ मजदूरों को हरियाणा में पुलिस ने रोककर उनकी पहचान पूछी थी। दस्तावेज वॉट्सएप पर भेजने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। ढाकी समुदाय के लिए दुर्गा पूजा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि साल भर की सबसे बड़ी कमाई का समय होता है। कोलकाता में जहां उन्हें 4,000-5,000 रुपये मिलते हैं, वहीं दिल्ली-मुंबई में यह 15,000 से 25,000 रुपये तक पहुंच जाता है, साथ में मुफ्त आवास और यात्रा का खर्च भी।