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बंगाल में जल्द शुरू होगी पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी व्यवस्था

डेंगू मौतों की होगी वैज्ञानिक पड़ताल मौत के कारणों का पता लगाना मुख्य उद्देश्य

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में डेंगू से होने वाली मौतों की वास्तविक वजह और प्रकृति को समझने के लिए स्वास्थ्य विभाग पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी (विशेष वैज्ञानिक पोस्टमार्टम) की व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी डेंगू संक्रमित मरीज की मृत्यु सीधे डेंगू वायरस के कारण हुई या फिर उससे उत्पन्न जटिलताओं अथवा अन्य बीमारियों की वजह से।

डेंगू से मौतों के आंकड़ों को लेकर है विवाद

राज्य में लंबे समय से डेंगू से मौतों के आंकड़ों को लेकर विवाद रहा है। कई मामलों में मरीज डेंगू से संक्रमित होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में मौत का कारण सीधे डेंगू नहीं माना गया। इसके चलते सरकारी आंकड़ों और विभिन्न चिकित्सक संगठनों के दावों में अंतर देखने को मिला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डेंगू संक्रमित होना और डेंगू के कारण मौत होना दो अलग-अलग बातें हैं। कई बार मरीज की मृत्यु मल्टी ऑर्गन फेलियर, गंभीर रक्तस्राव, शॉक सिंड्रोम या अन्य जटिलताओं से होती है, जिनकी जड़ में डेंगू संक्रमण हो सकता है।

की जाती है नमूनों की सूक्ष्म जांच

पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी के दौरान मृतक के विभिन्न अंगों, ऊतकों और रक्त के नमूनों की सूक्ष्म जांच की जाती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि डेंगू ने शरीर के किन अंगों को कितना प्रभावित किया और मौत में उसकी भूमिका कितनी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया से डेंगू डेथ ऑडिट को अधिक वैज्ञानिक आधार मिलेगा। साथ ही डेंगू से होने वाली मौतों के वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे, जिससे बीमारी की रोकथाम, उपचार व्यवस्था और स्वास्थ्य नीति को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह पहल डेंगूजनित मौतों को लेकर वर्षों से जारी विवाद को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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