नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसकी इमारत के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लगाने का अनुरोध किया गया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जाएगा।
पीठ ने उच्चतम न्यायालय के महासचिव से कहा कि वे “उचित नोट सक्षम प्राधिकारी (प्रधान न्यायाधीश) के सामने पेश करें।” पीठ ‘बड़ा खतरनाक’ के नाम से मशहूर बी. वेणुगोपाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल उच्चतम न्यायालय के नए परिसर का निर्माण हो रहा है, जहां इस तरह की वास्तु और प्रतीकात्मक जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।उन्होंने कहा, “हमारी एक नयी इमारत बन रही है; इसके बाद इस पर विचार करेंगे।” जब याचिकाकर्ता ने वर्तमान प्रतिष्ठित इमारत के बारे में सवाल उठाया, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि प्रशासन इस पर ध्यान देगा। उन्होंने कहा, “आप इस मुद्दे पर याचिका दायर करने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर मुझे पत्र लिख सकते हैं।”
खुद अदालत में पेश हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय से संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें 27 नवंबर 2025 को जवाब मिला था, जिसमें कहा गया था कि उच्चतम न्यायालय अपने अलग प्रतीक चिह्न का उपयोग करता है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह प्रशासनिक निर्णय उनका कार्यकाल शुरू होने (24 नवंबर 2025) से पहले लिया गया था। उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि क्या किया जाना है। कृपया इस तरह की याचिकाएं दायर न करें।”