नई दिल्ली : दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके के फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत के मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस पूछताछ में बजाज ने स्वीकार किया कि आग लगने के दौरान वह मौके पर पहुंचा था, लेकिन डर के कारण जलती हुई इमारत के सामने से गुजर गया और लोगों की मदद के लिए नहीं रुका।
घर नहीं गया, गिरफ्तारी से पहले शहर में भटकता रहा
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद बजाज अपने घर भी नहीं गया और शहर में इधर-उधर घूमता रहा। उसके बच्चों के विदेश में रहने के कारण पुलिस को आशंका थी कि वह देश छोड़कर भाग सकता है। इसी वजह से पुलिस ने उसके और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
छह कमरों की अनुमति, चल रहे थे 25 कमरे
जांच में सामने आया है कि बजाज के पास बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति थी, लेकिन वह कथित रूप से 25 कमरे चला रहा था। इनमें कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, बजाज ने पहले दो मंजिला भवन में कारोबार शुरू किया था और बाद में उसमें अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी थीं।
होटल प्रबंधन मैनेजर को सौंपा, पुलिस तलाश में
बजाज ने दावा किया कि होटल का पूरा संचालन उसने मैनेजर जय मिश्रा को सौंप रखा था और लाइसेंस भी जय मिश्रा के नाम पर जारी किए गए थे। फिलहाल पुलिस जय मिश्रा की तलाश कर रही है और बजाज के दावों की जांच कर रही है।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग की आशंका
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि पहले सिलेंडर विस्फोट की भी आशंका जताई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, होटल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा था। भवन में दो रसोईघर थे और वहां कई एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे।
सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही
जांच में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं। भवन में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था। खिड़कियां सील थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर आधारित था, जिससे आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि B&B योजना के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
12 विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत
बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे बेसमेंट में आग लगने के बाद लपटें तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गईं। अधिकांश मेहमान उस समय सो रहे थे। आग बुझाने के लिए 17 दमकल गाड़ियों को लगाया गया और 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
एक परिवार के आठ सदस्यों की गई जान
हादसे में गुरुग्राम निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल के परिवार के आठ सदस्यों की भी मौत हो गई। वे अपने बीमार पिता राधेश्याम अग्रवाल से मिलने दिल्ली आए थे, जो अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे में विवेक की पत्नी, दो बेटियां और चार अन्य रिश्तेदारों की जान चली गई। परिवार में अब केवल अस्पताल में भर्ती उनके पिता ही जीवित बचे हैं।