नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेता सलमान खान की याचिका पर फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लीगल’ के टीजर और उससे जुड़े प्रचार सामग्री को ऑनलाइन मंचों से हटाने का अंतरिम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति के नाम, पहचान, बोलने के अंदाज, हावभाव और अन्य विशिष्ट विशेषताओं का उसकी अनुमति के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने निर्माताओं को सोशल मीडिया, ओटीटी, टेलीविजन और प्रिंट सहित सभी माध्यमों से संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि डिजिटल माध्यम पर प्रसारित सामग्री तेजी से फैलती है और लंबे समय तक उपलब्ध रहती है, इसलिए किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि टीजर और पोस्ट से ऐसा संदेश जाता है कि फिल्म के प्रचार के लिए सलमान खान की सार्वजनिक छवि और व्यक्तित्व अधिकारों का इस्तेमाल किया गया। सलमान खान की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि फिल्म का टीजर काले हिरण शिकार मामले में अभिनेता से जुड़े घटनाक्रमों को दिखाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म में किरदार का नाम सलमान खान से मिलता-जुलता रखा गया है और प्रचार अभियान में अभिनेता के नाम तथा छवि का इस्तेमाल किया गया।
काला हिरण शिकार मामला वर्ष 1998 का है, जब सलमान खान पर राजस्थान के जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान दो काले हिरणों के शिकार का आरोप लगा था। इस मामले में बिश्नोई समाज की शिकायत के बाद वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने वर्ष 2018 में सलमान खान को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। अभिनेता ने इस फैसले को चुनौती दी थी और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। वहीं, इस मामले में अन्य सह-कलाकारों को अदालतों से राहत मिल चुकी है।
फिल्म निर्माता अमित जानी की ओर से अदालत में कहा गया कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है और सार्वजनिक घटनाओं या न्यायिक मामलों पर आधारित कहानी के लिए किसी व्यक्ति को विशेष अधिकार नहीं मिल सकता। निर्माताओं ने कहा कि फिल्म को अभी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणन भी नहीं मिला है।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि संबंधित टीजर और पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाए जाएं। यदि निर्धारित समय में सामग्री नहीं हटाई जाती है तो एक्स, मेटा और गूगल जैसे मंचों को इसे हटाने के लिए कदम उठाने होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम आदेश है और मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है।