निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बेलघरिया, उत्तर 24 परगना: पश्चिम बंगाल में स्टेटस आइडेंटिफिकेशन रिव्यू (SIR) प्रक्रिया की घोषणा के बाद से फैली दहशत का एक और हृदय विदारक मामला सामने आया है। SIR के खौफ से 63 वर्षीय वृद्ध अशोक सरदार ने बुधवार देर रात बेलघरिया एक्सप्रेस-वे के निकट रेलवे ट्रैक पर कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया।
बेलघरिया के सीसीआर ब्रिज के पास हुई इस भयावह घटना में रिक्शा चालक अशोक सरदार गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल आरजी कर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा। फिलहाल उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
अशोक सरदार के परिवार ने दावा किया है कि इस आत्मघाती कदम के पीछे SIR का डर ही मुख्य कारण है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, अशोक सरदार और उनकी पत्नी दोनों का नाम साल 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। जब उन्हें इस बात का पता चला, तो वह गहरे सदमे और दहशत में डूब गए।
परिवार ने बताया कि उन्हें लगातार इस बात की चिंता सता रही थी कि 2002 की मतदाता सूची में नाम न होने के कारण अब उनका क्या होगा, क्या उन्हें अपना घर और पहचान खोकर कहीं और जाना पड़ेगा। परिवार का स्पष्ट आरोप है कि 'देश से निकाले जाने' के इसी डर ने वृद्ध को ऐसा भयानक कदम उठाने पर मजबूर किया।
अशोक सरदार की बेटी चैताली सरदार ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया, "पिछले कुछ दिनों से पिताजी बार-बार कहते थे कि मेरे पास कोई ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं है, कहीं मुझे देश से बाहर न निकाल दिया जाए। वह लगातार इसी चिंता में डूबे रहते थे।"
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि SIR और मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर राज्य के आम नागरिकों, खासकर उन लोगों में, जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज़ या पुराने मतदाता सूची का रिकॉर्ड नहीं है, किस तरह का मानसिक तनाव और असुरक्षा का माहौल है। अतीत में भी इस तरह के डर के कारण आत्महत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं, यहाँ तक कि बीएलओ (BLO) के काम के दबाव में आत्महत्या की खबरें भी आई हैं।
पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है और SIR की प्रक्रिया को लेकर मानवीय संकट पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।