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डीम्ड यूनिवर्सिटी विवाद: सांसद रे पहुंचे धरना स्थल

धरना स्थल पर सांसद रे, समर्थन का भरोसा

छात्र आंदोलन को मिला सांसद का साथ

डीम्ड यूनिवर्सिटी मुद्दे पर सांसद सक्रिय

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी को लेकर जारी असंतोष के बीच सांसद बिष्णु पद रे 17 फरवरी को चल रहे छात्र विरोध स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों, स्थानीय संगठनों तथा आम जनता से सीधे संवाद किया। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों को लेकर छात्रों के बीच भ्रम और असंतोष बढ़ रहा था। विरोध स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि सांसद का आगमन स्वागत योग्य है, किंतु कुछ राजनीतिक बयानों के बाद राजनीतिक रुख की स्पष्टता को लेकर कई छात्र असमंजस में हैं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पूर्व में द्वीपव्यापी बंद के दौरान पूरे अंडमान क्षेत्र ने अपनी सामूहिक भावना प्रदर्शित की थी, जब श्री विजयपुरम से डिगलीपुर और अन्य क्षेत्रों तक बाजार, संस्थान और विभिन्न क्षेत्र बंद रहे थे। उनके अनुसार यह बंद इस बात का स्पष्ट संकेत था कि द्वीपों की बड़ी आबादी डीम्ड यूनिवर्सिटी प्रस्ताव को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती। सभा को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि उनका रुख प्रारंभ से एक समान रहा है और उन्होंने औपचारिक रूप से डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्थान पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग करते हुए अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय को दलगत राजनीति के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए तथा सार्वजनिक भावना के विपरीत दिए गए कुछ बयानों से वे सहमत नहीं हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर छात्रों के साथ चर्चा के दौरान हुए व्यवहार पर चिंता जताई थी। छात्रों ने सांसद से पूर्व दिवस के बड़े प्रदर्शन में उनकी अनुपस्थिति पर प्रश्न उठाया तथा केवल लिखित पत्राचार के बजाय ठोस परिणामों का आश्वासन मांगा। इसके उत्तर में श्री रे ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं संबंधित मंत्रालयों को लिखित प्रतिवेदन पहले ही भेजे जा चुके हैं। उन्होंने जोड़ा कि विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है और मामला केंद्र सरकार के विचाराधीन है। वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच होने वाली भविष्य की बैठकों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी की, ताकि छात्रों की भागीदारी रहे और निर्णय स्पष्ट रूप से संप्रेषित हों। इस पर सांसद ने सहमति जताते हुए कहा कि खुला संवाद आवश्यक है तथा छात्रों, विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त बैठक आगे का उचित मार्ग होगी। उन्होंने सभा को आश्वस्त किया कि वे दिल्ली में इस विषय को लगातार उठाते रहेंगे और जनता को गुमराह करने का उनका कोई इरादा नहीं है। विरोध प्रदर्शन अब विस्तारित चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें छात्र सुबह कक्षाएं अटेंड करने के बाद दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक पुनः प्रदर्शन कर रहे हैं। सांसद के दौरे से अस्थायी भरोसा अवश्य बना, किंतु छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक स्पष्ट एवं आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


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