टॉप न्यूज़

शिक्षकों को समर्पित: कैंसर को हराने वाले प्रोफेसर की कहानी

संस्कृति, शिक्षा और संघर्ष की अनूठी शुरुआत

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बर्दवान के एक दूरदराज गांव से निकलकर कोलकाता के प्रतिष्ठित गोयनका कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक और कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल करने वाले डॉ. निबिर गोस्वामी ने कॉस्ट अकाउंटेंसी की पेशेवर डिग्री भी प्राप्त की। डंकन ग्रुप में छह साल तक फाइनेंस प्रोफेशनल के तौर पर काम करने के बाद, अध्यापन के प्रति अपने गहरे जुनून के कारण वे हुगली के विद्यासागर कॉलेज से जुड़े। बर्दवान विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी करने वाले डॉ. गोस्वामी पिछले 28 वर्षों से इसी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और कॉमर्स विभाग के एचओडी के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा, वह कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीन एनएनडीसी कॉलेज और श्री अग्रसेन कॉलेज के पीजी विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। भाषण कला, चित्रकारी और गिटार वादन के शौकीन डॉ. गोस्वामी का जीवन अनुशासन और प्रेरणा की मिसाल रहा है।

अचानक स्वास्थ्य संकट और कैंसर से जंग

मई 2026 में उनके जीवन में तब एक बड़ा मोड़ आया जब पीएसए (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) का स्तर बढ़ने पर गहन जांच के दौरान प्रोस्टेट में कैंसर (मैलिग्नेंसी) का पता चला। मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया के कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. बास्ताब घोष ने एक महीने की हॉर्मोन थेरेपी के बाद लैप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी की सलाह दी। 1 जुलाई 2026 को यह जटिल सर्जरी पूरी तरह सफल रही। कैथेटर हटने के मात्र 10 दिन के भीतर ही उन्होंने अपने मूत्र पर पूर्ण नियंत्रण पा लिया। जुलाई के अंत तक वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने कार्यक्षेत्र में लौट आए और आज एक सामान्य व सक्रिय जीवन जी रहे हैं।

डॉक्टर और मरीज का अनूठा संवाद

अपनी इस विजयी यात्रा को याद करते हुए डॉ. गोस्वामी ने साझा किया, "मास्टर डिग्री पूरी करने के वर्षों बाद मुझे डॉ. घोष के शब्दों के रूप में जैसे एक नया प्रमाण पत्र मिला, जब उन्होंने मुझसे कहा—'आप डिस्टिंक्शन के साथ उत्तीर्ण हुए हैं।' मैं डॉ. बास्ताब घोष और मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया की पूरी मेडिकल टीम का दिल से आभारी हूँ, जिन्होंने मेरे जीवन को फिर से पटरी पर ला दिया।"

समीक्षा और विशेषज्ञ की सलाह डॉ. बास्ताब घोष ने इस सफल रिकवरी पर प्रकाश डालते हुए कहा, "प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में निरंतर निगरानी और शुरुआती पहचान सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। सर्जरी के बाद मूत्र पर नियंत्रण खोना मरीजों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होता है, लेकिन डॉ. निबिर की इच्छाशक्ति ने साबित कर दिया कि एक फाइटर क्या कुछ हासिल कर सकता है। इस शिक्षक दिवस पर, मैं उनके अदम्य साहस को सलाम करता हूँ और देश के सभी शिक्षकों को अपनी श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ।"

SCROLL FOR NEXT