केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन तथा पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 
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विजयन के खिलाफ प्राथमिकी पर कानूनी समीक्षा के बाद फैसला : सतीशन

ED के पत्र पर केरलम सरकार का रुख

तिरुवनंतपुरम। केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. तथा अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्र पर कानूनी समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में सतीशन ने स्पष्ट किया कि मामले में सरकार की कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव या राजनीतिक उद्देश्य से नहीं होगी।

PMLA की धारा 66(2) के तहत पत्र

सतीशन ने बताया कि राज्य सरकार को ED की ओर से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 66(2) के तहत एक पत्र प्राप्त हुआ है। इस पत्र में पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और उनके दामाद पी.ए. मोहम्मद रियाज समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, चूंकि पत्र एक केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से भेजा गया है, इसलिए उस पर सीधे निर्णय लेने के बजाय पहले उसके कानूनी पहलुओं और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच जरूरी है।

आरोपों को केवल इसलिए खारिज नहीं करेंगे

सतीशन ने कहा कि सरकार ED की ओर से लगाए गए आरोपों को सिर्फ इस वजह से खारिज नहीं कर सकती कि वे एक केंद्रीय एजेंसी की ओर से आए हैं। उन्होंने कहा कि ED के आरोप कितने गंभीर हैं और उनके आधार पर राज्य पुलिस के स्तर पर प्राथमिकी दर्ज करने की कानूनी स्थिति बनती है या नहीं, इसका परीक्षण किया जाएगा। पत्र को इसी उद्देश्य से कानूनी समीक्षा के लिए भेजा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का फैसला कानून और उपलब्ध सामग्री के आधार पर होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में कानून को अपना काम करने दिया जाएगा।

ED ने DGP से मांगी प्राथमिकी

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब ED ने केरल के पुलिस महानिदेशक रावदा ए. चंद्रशेखर को पत्र भेजकर विजयन, वीणा टी., मोहम्मद रियाज और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। जांच एजेंसी ने कहा है कि PMLA के तहत की गई जांच और तलाशी के दौरान जो साक्ष्य सामने आए हैं, उनके आधार पर अन्य कानूनों के तहत भी अपराध की जांच आवश्यक है।

ED की ओर से राज्य पुलिस को भेजा गया यह पत्र इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एजेंसी ने अपनी जांच के निष्कर्षों को आगे की आपराधिक कार्रवाई के लिए राज्य पुलिस के साथ साझा किया है।

CMRL से जुड़ा है पूरा विवाद

मामले के केंद्र में कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा टी. से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुआ कथित वित्तीय लेन-देन है। ED का आरोप है कि CMRL ने एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को करीब 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

जांच एजेंसी के अनुसार इन भुगतानों को ‘आईटी परामर्श सेवाओं’ के नाम पर दर्शाया गया था। ED का आरोप है कि ये भुगतान वास्तव में फर्जी थे और कथित तौर पर ऐसी सेवाओं के बदले किए गए जिनका वास्तविक स्वरूप जांच के दायरे में है।

एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस अब बंद

वीणा टी. से जुड़ी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस अब बंद हो चुकी है। हालांकि कंपनी के पूर्व वित्तीय लेन-देन जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि CMRL से कंपनी को मिली रकम की वास्तविक प्रकृति क्या थी और क्या इन भुगतानों के पीछे कोई अन्य वित्तीय व्यवस्था या उद्देश्य था ?

तलाशी के बाद वीणा से पूछताछ

ED ने इस मामले में जून के दौरान वीणा टी. से जुड़े परिसरों की तलाशी ली थी। तलाशी के बाद उनसे पूछताछ भी की गई। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री से उसे मामले में आगे की कार्रवाई के लिए आधार मिला।

इसी जांच से प्राप्त सामग्री का उल्लेख करते हुए ED ने राज्य पुलिस से संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।

धारा 66(2) का क्या महत्व है

PMLA की धारा 66(2) के तहत ED को अपनी जांच के दौरान सामने आए ऐसे तथ्यों को अन्य कानून-प्रवर्तन या नियामक एजेंसियों के साथ साझा करने की अनुमति है, जिनसे किसी अन्य कानून के उल्लंघन का संकेत मिलता हो। इस मामले में ED ने इसी प्रावधान के तहत अपनी जांच से संबंधित सामग्री के आधार पर केरल पुलिस से कार्रवाई का अनुरोध किया है।

इसका अर्थ यह है कि ED की जांच और राज्य पुलिस के स्तर पर संभावित आपराधिक मामला दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। ED ने अपनी जांच में जो पाया है, उसके आधार पर पुलिस को संबंधित अपराधों की जांच और प्राथमिकी के लिए कहा गया है।

सतीशन ने कहा, मामला सिर्फ धन मिलने का नहीं

CMRL से धन प्राप्त करने के आरोपों को लेकर जब सतीशन से UDF सरकार के कुछ मंत्रियों के पुराने मामलों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को कंपनियों से चंदा मिलता रहा है। हालांकि उन्होंने मौजूदा ED मामले को उससे अलग बताया।

सतीशन के अनुसार, ED के पत्र में केवल CMRL से धन प्राप्त करने का उल्लेख नहीं है, बल्कि उससे कहीं अधिक गंभीर आरोपों और जांच में सामने आई सामग्री का जिक्र है। इसलिए पुराने राजनीतिक चंदे के मामलों और विजयन से जुड़े मौजूदा मामले को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता।

माकपा ने कांग्रेस-भाजपा पर उठाया सवाल

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस और भाजपा के बीच किसी तरह का समझौता हो सकता है। उनका संकेत था कि ED की कार्रवाई और कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के रुख के पीछे राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं।

सतीशन ने आरोपों को बताया बचाव की कोशिश

गोविंदन के आरोप पर सतीशन ने पलटवार करते हुए कहा कि वामपंथी दल अपने कृत्यों को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि कांग्रेस इस मामले में दोहरा रवैया अपना रही है।

सतीशन के मुताबिक, कांग्रेस का रुख जांच एजेंसियों की कार्रवाई के मामले में एक समान रहा है और मौजूदा मामले में भी सरकार केवल कानून के आधार पर निर्णय लेगी।

राहुल गांधी की पूछताछ का दिया उदाहरण

कांग्रेस के दोहरे रवैये के आरोप को खारिज करने के लिए सतीशन ने राहुल गांधी से ED की पूछताछ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी से ED ने 50 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी, तब कांग्रेस ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग किया था।

उन्होंने कहा कि उस दौरान दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ED के वाहनों को नुकसान नहीं पहुंचाया था। इसके विपरीत, सतीशन ने आरोप लगाया कि इस साल की शुरुआत में विजयन के किराए के आवास पर ED की तलाशी के बाद केरलम में माकपा कार्यकर्ताओं ने एजेंसी के वाहनों को नुकसान पहुंचाया था।

कांग्रेस के दोहरे रवैये से इनकार

सतीशन ने इन दोनों घटनाओं का हवाला देकर कहा कि कांग्रेस जांच एजेंसियों के मामले में दोहरा रवैया नहीं अपना रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस अपने नेताओं से जुड़े मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करती रही है और अब जब ED ने राज्य पुलिस को पत्र भेजा है, तो सरकार भी उसी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।

अब कानूनी समीक्षा पर टिकी नजर

फिलहाल मामले में सबसे अहम कदम ED के पत्र की कानूनी समीक्षा है। सरकार यह देखेगी कि जांच एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और आरोप किन अपराधों की ओर संकेत करते हैं तथा क्या उनके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद है।

इस समीक्षा के बाद ही तय होगा कि विजयन, वीणा टी., मोहम्मद रियाज और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की जाए या नहीं। इसलिए वर्तमान स्थिति में ED की ओर से लगाए गए आरोप जांच के निष्कर्ष और आरोप हैं; इन्हें अभी अदालत द्वारा सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।

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