नई दिल्ली : किशोरावस्था में शारीरिक गतिविधि को आमतौर पर फिटनेस, वजन नियंत्रण और शरीर को स्वस्थ रखने से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन नए शोध से संकेत मिलता है कि नियमित रूप से पैदल चलना किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
‘JAMA Network Open’ में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 11–12 वर्ष की उम्र में जो किशोर अधिक कदम चलते थे, उनमें लगभग एक साल बाद चिंता, उदासी और व्यवहार संबंधी समस्याओं के लक्षण अपेक्षाकृत कम देखे गए। अध्ययन में 5,515 किशोरों को शामिल किया गया था।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की रोजाना की गतिविधि का आकलन करने के लिए उन्हें करीब तीन सप्ताह तक Fitbit पहनाया। इस दौरान उनके प्रतिदिन चलने वाले कदमों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इसके बाद उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।
अध्ययन में कदमों की संख्या और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक स्पष्ट संबंध दिखाई दिया। 5,000 से कम कदम रोजाना चलने वाले किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण अधिक पाए गए, जबकि प्रतिदिन 12,000 या उससे अधिक कदम चलने वाले किशोरों में ये लक्षण सबसे कम थे।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह नहीं कहा कि अधिक कदम चलना सीधे तौर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को रोकता है। अध्ययन मुख्य रूप से दोनों के बीच संबंध को दर्शाता है। दूसरे शब्दों में, अधिक सक्रिय किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर पाया गया, लेकिन इसके पीछे अन्य सामाजिक, पारिवारिक और जीवनशैली संबंधी कारण भी हो सकते हैं।
इस अध्ययन की एक खास बात यह है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित लाभ केवल बहुत अधिक चलने वाले किशोरों तक सीमित नहीं दिखे। शोधकर्ताओं के अनुसार, रोजाना की गतिविधि में 1,000 से 2,000 अतिरिक्त कदम जोड़ना भी मस्तिष्क की बेहतर संरचना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा पाया गया।
इसका मतलब यह है कि किशोरों को अचानक बहुत कठिन व्यायाम या लंबी दूरी तक चलने के लिए मजबूर करने के बजाय उनकी मौजूदा दिनचर्या में छोटी-छोटी गतिविधियां बढ़ाना अधिक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों की रोजाना की गतिविधि बढ़ाने के लिए कई सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। यदि परिस्थितियां सुरक्षित हों तो स्कूल तक पैदल जाना, स्कूल के बाद कुछ समय टहलना, दोस्तों के साथ सक्रिय खेल खेलना या किसी पसंदीदा आउटडोर गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना मददगार हो सकता है।
माता-पिता और स्कूल भी बच्चों को लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठने, चलने और खेल-कूद में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
किशोरावस्था मस्तिष्क के विकास का महत्वपूर्ण दौर है। इस समय नियमित शारीरिक गतिविधि नींद, तनाव और समग्र स्वास्थ्य जैसे कई कारकों को प्रभावित कर सकती है, जो बदले में मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं।
अध्ययन में मस्तिष्क की संरचना और मानसिक स्वास्थ्य के बीच भी संबंध देखा गया। हालांकि, इन संबंधों को पूरी तरह समझने के लिए और शोध की आवश्यकता है।
शोध के परिणामों का यह अर्थ नहीं है कि हर किशोर को हर दिन अनिवार्य रूप से 12,000 कदम पूरे करने चाहिए। अलग-अलग बच्चों की उम्र, शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य, स्कूल की दिनचर्या और रहने का वातावरण अलग होता है।
इसलिए लक्ष्य केवल कदमों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि किशोरों को नियमित रूप से सक्रिय रखना होना चाहिए। थोड़ी अतिरिक्त पैदल गतिविधि, खेल या अन्य पसंदीदा शारीरिक गतिविधियां भी उनकी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
कुल मिलाकर, अध्ययन इस ओर इशारा करता है कि किशोरों की रोजमर्रा की शारीरिक सक्रियता का संबंध केवल मजबूत शरीर से नहीं, बल्कि बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ मस्तिष्क विकास से भी हो सकता है। छोटे-छोटे बदलाव—जैसे कुछ दूरी पैदल तय करना या रोजाना थोड़ा अधिक चलना—किशोरों की समग्र सेहत के लिए उपयोगी कदम साबित हो सकते हैं।