वसूली के खिलाफ रची थी साजिश
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस उदय कुमार ने एक निजी बैंक के मैनेजर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक सिविल मामला था। जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि कर्ज की वसूली के लिए बैंक मैनेजर की तरफ से उठाए गए कदम के बाद यह आपराधिक मामला दर्ज कराया गया था।
एडवोकेट प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस उदय कुमार ने कहा है कि अगर इस मामले को चलाया जाता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। विकास कोविल की तरफ से यह पिटीशन दायर किया गया था। एडवोकेट श्रीवास्तव ने बताया कि शहीदुल हसन ने एक वाहन के लिए लोन लिया था। किस्त जमा नहीं करने पर बैंक ने उस वाहन को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके पांच सप्ताह बाद बरहमपुर अदालत में मैनेजर के खिलाफ मारपीट और शीलहरण का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर कर दिया गया। इसे खारिज करने के लिए बैंक मैनेजर की तरफ से हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन पिटिशन दायर किया गया था। जस्टिस उदय कुमार ने कहा है कि बैंक मैनेजर गिरवी रखी गई संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा था। उन्होंने कहा है कि एक सोची समझी साजिश के तहत यह मामला दायर किया गया था। इसका कोई कानूनी आधार नहीं है इसलिए खारिज किया जाता है।