हिंदू श्मशान भूमि पर शराब बार निर्माण के मामले में सांसद बिष्णु पद रे सीबीआई जांच की मांग करते हुए संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए 
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श्मशान भूमि पर बार निर्माण का मामला : सांसद ने सीबीआई जांच की मांग की

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने पोर्ट ब्लेयर के फोरशोर रोड स्थित उस भूमि पर बार-कम-रेस्तरां के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसका परंपरागत रूप से हिंदू श्मशान एवं दफन भूमि के रूप में उपयोग होता रहा है। सांसद ने इस संबंध में उपराज्यपाल एवं मुख्य सचिव को पत्र लिखकर संरक्षित सरकारी भूमि के कथित अवैध उपयोग और स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सांसद के अनुसार उक्त स्थल पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि यह भूमि ऐतिहासिक रूप से श्मशान और दफन के लिए प्रयुक्त होती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्रिस्तान की चारदीवारी को ध्वस्त कर दिया गया है और दफन कार्यों के लिए प्रयुक्त एक टीले की लगभग सीधी खुदाई की गई है। सांसद ने बताया कि आसपास कई कब्र मौजूद हैं, जिनमें भाजपा के दिवंगत प्रदेश अध्यक्ष आर. मोहन की समाधि भी शामिल है। बिष्णु पद रे ने कहा कि यह भूमि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भूमि राजस्व एवं भूमि सुधार विनियमन, 1966 के अंतर्गत “सेट अपार्ट” सरकारी भूमि है, जिसे विशेष रूप से श्मशान और दफन के लिए आरक्षित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी भूमि को विधिसम्मत प्रक्रिया और वैधानिक आवंटन के बिना किसी व्यावसायिक गतिविधि, विशेषकर शराब बार या रेस्तरां के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। सांसद ने स्मार्ट सिटी निधि का उपयोग शराब से संबंधित व्यावसायिक ढांचे के निर्माण के लिए किए जाने को सार्वजनिक उद्देश्य और वित्तीय मर्यादा का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर निकायों द्वारा बार-कम-रेस्तरां के रूप में स्थल को दर्शाना अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है, क्योंकि शराब लाइसेंसिंग एक अलग वैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत आती है। बिष्णु पद रे ने बताया कि इस मुद्दे पर पूर्व में विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों, वार्ड पार्षदों और नागरिक समूहों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिसके बाद सतर्कता जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मामले को गंभीर, संवेदनशील और कानून के शासन, धार्मिक गरिमा तथा जनविश्वास से जुड़ा बताते हुए सांसद ने निर्माण कार्य को तत्काल रोकने, भूमि को सुरक्षित करने और सार्वजनिक धन की आगे की बर्बादी रोकने की मांग की है। उन्होंने पूरे मामले को स्थानीय प्राधिकारियों के दायरे से बाहर कर स्वतंत्र जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की भी मांग की है। सांसद ने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण तथा स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की देरी या निष्क्रियता से जन असंतोष और गहरा होगा।

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