रांचीः भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को कहा कि पार्टी वाम मोर्चे के हिस्से के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 10 सीट पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने में विफल रहा है कि पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक 'विचाराधीन' मतदाता चुनाव में मतदान कर सकेंगे। 'न्यायिक जांच के दायरे में' आने वाले मतदाता वे हैं, जिनकी मतदान करने की पात्रता वर्तमान में न्यायिक जांच के अधीन है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा कि वाम दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित राज्य में एक मजबूत विकल्प प्रदान करने और भाजपा को रोकने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसी भी तरह से बंगाल में सत्ता में आना चाहती है।
पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2011 तक 34 वर्षों तक लगातार राज्य पर शासन किया था। यह गठबंधन 2021 के विधानसभा चुनावों में एक भी सीट जीतने में विफल रहा था। पश्चिम बंगाल में इस बार वाम दलों की संभावनाओं के बारे में भट्टाचार्य ने दावा किया कि एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जो बंगाल में राजनीतिक गुट के लिए सकारात्मक है। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में पहली बार भाकपा (माले) लिबरेशन और वाम मोर्चा के बीच सीट बंटवारे की व्यवस्था हुई है। हम वाम गठबंधन के तहत 10 सीट पर चुनाव लड़ेंगे। आईएसएफ भी सीट के इस बंटवारे समझौते का हिस्सा होगी।’’
वाम मोर्चा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 192 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची सोमवार को घोषित की। वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने यह भी कहा कि भाकपा (माले) लिबरेशन और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) सहयोगी दलों के रूप में उम्मीदवार उतारेंगे। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे। मतगणना चार मई को होगी।