बंबई हाईकोर्ट ( फाइल फोटो ) 
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हर उल्लंघन पर अदालत दखल नहीं दे सकती: RBI नियमों पर बंबई हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख

बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ‘मास्टर डायरेक्शन’ का उद्देश्य धोखाधड़ी एवं कपटपूर्ण उधारकर्ताओं की पहचान कर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है और इनके प्रत्येक उल्लंघन को न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं लाया जा सकता

Narendra Kumar Singh

मुंबईः बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ‘मास्टर डायरेक्शन’ का उद्देश्य धोखाधड़ी एवं कपटपूर्ण उधारकर्ताओं की पहचान कर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है और इनके प्रत्येक उल्लंघन को न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं लाया जा सकता। उद्योगपति अनिल अंबानी के खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ के रूप में वर्गीकृत करने की तीन बैंक की कार्रवाई पर लगी रोक हटाते हुए अदालत ने यह बात कही।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने एकल पीठ के दिसंबर 2025 के उस अंतरिम आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

अदालत ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक और लेखा परामर्श कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी की, दिसंबर 2025 में पारित एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अंबानी के वकीलों ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि आदेश पर रोक लगाई जाए ताकि वे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकें, लेकिन अदालत ने यह मांग ठुकरा दी।

मंगलवार को उपलब्ध कराए गए फैसले की प्रति के अनुसार, अदालत ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ‘मास्टर डायरेक्शन’ की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती जिससे ऋणदाता बैंकों के हितों को क्षति पहुंचे। आरबीआई का ‘मास्टर डायरेक्शन’ विभिन्न विषयों पर समय-समय पर जारी किए गए सभी परिपत्रों/दिशा-निर्देशों का एक समेकित, अद्यतन और व्यवस्थित दस्तावेज है।

अदालत ने कहा कि यह मुद्दा सार्वजनिक महत्व का है और देश की वित्तीय प्रणाली से जुड़ा है, इसलिए ऐसे मामले में अंतरिम स्थगन देना ‘‘स्पष्ट रूप से अवैध’’ था। फैसले में कहा गया कि मामले के तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कठिन नहीं है कि यदि अंबानी के खिलाफ कार्यवाही जारी रहती है तो उन्हें ‘‘कोई अपूरणीय क्षति’’ नहीं होगी।

अदालत ने कहा, ‘‘ प्रतिवादी (अंबानी) के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने की प्रथम दृष्टया कोई वजह नजर नहीं आती है। आपराधिक जांच जारी है, जो अदालत द्वारा दी गई निषेधाज्ञा से सीधे प्रभावित होगी।’’ अदालत ने एकल पीठ के आदेश की, ‘‘विरोधाभासी निष्कर्षों’’ के लिए भी आलोचना की और कहा कि यह ‘‘तथ्य और कानून की त्रुटिपूर्ण मान्यताओं’’ पर आधारित था। एकल पीठ ने आरबीआई द्वारा जारी ‘मास्टर डायरेक्शन’ के मूल उद्देश्य को पूरी तरह गलत समझा जिन्हें बैंकिंग नीति के हित में जारी किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ ये ‘मास्टर डायरेक्शन’ सार्वजनिक धन की सुरक्षा एवं धोखाधड़ी के शीघ्र पता लगाने तथा समय पर पहचान, नियंत्रण, रिपोर्टिंग और जोखिम शमन के माध्यम से सार्वजनिक धन की वसूली के लिए एक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।’’

अदालत ने कहा कि इन निर्देशों के माध्यम से आरबीआई बैंकों को धोखाधड़ी और कपटपूर्ण उधारकर्ताओं की जानकारी साझा करता है ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके और बैंकों के हितों की रक्षा हो सके।

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